358 ज्योति कलशों से जगमगाया मां बंजारी का दरबार, नवरात्रि में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

शुद्ध घी के 2 और तेल के 358 ज्योति कलशों से आलोकित हुआ सिद्धपीठ; मंदिर के जीर्णोद्धार एवं विस्तार के लिए श्रद्धालु कर रहे गुप्त दान और निर्माण सामग्री देने की घोषणा

साल्हेवारा। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर वनांचल साल्हेवारा से लगभग 7 किलोमीटर दूर स्थित मनोकामना सिद्धपीठ मां बंजारी का दरबार श्रद्धा, भक्ति और आस्था से सराबोर है। मंदिर में प्रज्वलित तेल के 358 ज्योति कलश और शुद्ध घी के 2 ज्योति कलश माता रानी के दरबार की दिव्यता को विशेष रूप से बढ़ा रहे हैं। ज्योति कलशों की स्वर्णिम आभा और माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। मां के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों सहित कवर्धा जिले और पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

मंदिर के पुजारी पंडित नरेंद्र मिश्रा ने साल्हेवारा संवाददाता दिलीप शुक्ला को जानकारी देते हुए बताया कि शारदीय नवरात्रि में ऐतिहासिक ज्योति प्रज्वलन के साथ मां बंजारी का दरबार भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में उन्नति की कामना कर रहे हैं।

 मनोकामना सिद्धपीठ मां बंजारी के दरबार में अटूट श्रद्धा

मां बंजारी के दरबार को क्षेत्रवासी मनोकामना सिद्धपीठ के रूप में श्रद्धापूर्वक मानते हैं। भक्तों की आस्था है कि सच्चे मन और पूर्ण श्रद्धा से माता के दरबार में आने वाला व्यक्ति मां का आशीर्वाद लेकर लौटता है। इसी विश्वास के चलते नवरात्रि के दौरान दूर-दराज के गांवों और दूसरे राज्यों से भी श्रद्धालु माता रानी के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। पूजा-अर्चना, दीपों की रोशनी और ज्योति कलशों की दिव्य छटा ने मंदिर परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया है।

मंदिर के जीर्णोद्धार एवं विस्तार के लिए भक्तों की सराहनीय पहल

मां बंजारी के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर के विकास और विस्तार में सहयोग के रूप में भी सामने आ रही है। पुजारी पंडित नरेंद्र मिश्रा के अनुसार, अनेक श्रद्धालु मंदिर के जीर्णोद्धार एवं विस्तार के लिए गुप्त दान कर रहे हैं। वहीं, कुछ भक्त छड़, सीमेंट तथा अन्य निर्माण सामग्री उपलब्ध कराने के लिए अपनी ओर से घोषणा भी कर रहे हैं।

माता रानी के प्रति समर्पण और सेवा भावना से प्रेरित श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग देकर मंदिर के विकास में सहभागी बन रहे हैं। भक्त मां का आशीर्वाद प्राप्त कर जीवन में उत्तम प्रगति, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के साथ विदा हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की यह पहल धार्मिक आस्था के साथ सामूहिक सहयोग और जनभागीदारी की सुंदर मिसाल प्रस्तुत कर रही है।

 कभी दुर्गम घाट, अब सड़क निर्माण से दर्शन की राह आसान

साल्हेवारा से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित मां बंजारी धाम तक पहुंचने वाला पहाड़ी मार्ग कभी दुर्गम घाट के रूप में जाना जाता था। पहाड़ियों और घुमावदार मोड़ों से गुजरने वाले इस मार्ग पर आवागमन यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है। हालांकि, लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सड़क निर्माण एवं संकेतक लगाए जाने से श्रद्धालुओं की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हुई है। नवरात्रि के दौरान छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों, कवर्धा जिले और पड़ोसी मध्यप्रदेश से श्रद्धालु इस मार्ग से माता के दरबार में पहुंच रहे हैं। अनेक भक्त पैदल यात्रा करते हुए भी अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। मां बंजारी के दर्शन के साथ डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही भी इस क्षेत्र में दिखाई दे रही है।

शेर-शेरनी की मान्यता और तेंदुए की मौजूदगी से चर्चाओं का रोमांच

मां बंजारी धाम की धार्मिक महत्ता के साथ वनांचल की प्राकृतिक विशेषताएं भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच ऐसी मान्यताएं और चर्चाएं रही हैं कि नवरात्रि के दौरान माता रानी के वाहन शेर-शेरनी मंदिर के आसपास दिखाई देते थे। हालांकि, इस मान्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है। वहीं, क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी की चर्चाएं भी लोगों की जिज्ञासा बढ़ाती हैं। वनांचल की जैव विविधता, मंदिर की धार्मिक आस्था और नवरात्रि का उत्साह इस क्षेत्र को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं।

आस्था की पुकार—आइए, मां बंजारी की शरण में

358 तेल ज्योति कलशों और 2 शुद्ध घी के ज्योति कलशों से आलोकित मां बंजारी का दरबार नवरात्रि में श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बना हुआ है। एक ओर ज्योति कलशों की दिव्य आभा भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान कर रही है, वहीं दूसरी ओर मंदिर के जीर्णोद्धार एवं विस्तार के लिए श्रद्धालुओं का स्वैच्छिक सहयोग मां के प्रति उनकी अटूट आस्था को दर्शाता है।

पहाड़ियों से घिरे प्राकृतिक परिवेश में स्थित यह सिद्धपीठ धार्मिक विश्वास, जनसहयोग और भक्ति का प्रमुख केंद्र है। मां के दरबार में गूंजते जयकारे, श्रद्धालुओं की सेवा भावना और मंदिर के विकास के लिए आगे आते भक्त नवरात्रि की पावन बेला को और भी विशेष बना रहे हैं।

आइए, मां बंजारी की शरण में चलें, माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त करें और श्रद्धा, सेवा एवं सद्भाव के साथ जीवन में उत्तम प्रगति की कामना करें।

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