वार्ड नंबर 4 में स्ट्रीट लाइटें बंद, सड़क पर मवेशियों का डेरा; नशेड़ियों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
राजनांदगांव। नगर निगम के वार्ड नंबर 4 में शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह (बालक) से नया ढाबा की ओर जाने वाला मार्ग इन दिनों रात के अंधेरे में डूबा हुआ है। सड़क किनारे लगी स्ट्रीट लाइटें बंद होने से राहगीरों और वाहन चालकों के लिए यह रास्ता परेशानी और खतरे का सबब बनता जा रहा है।
हालात यह हैं कि अंधेरा होते ही सड़क पर बैठे मवेशी नजर तक नहीं आते। अचानक सामने आने वाले मवेशियों से दोपहिया वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। वहीं, पर्याप्त रोशनी नहीं होने से राहगीरों को भी इस मार्ग से गुजरने में डर महसूस होता है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात के समय इस इलाके में

भी सामने आती रही हैं। स्ट्रीट लाइट बंद रहने से ऐसे तत्वों को अंधेरे का फायदा मिलने की आशंका जताई जा रही है। इससे आसपास के रहवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है।
सवाल यह है—जिम्मेदारों की नजर कब पड़ेगी?
नगर निगम क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर खर्च होने के बावजूद यदि प्रमुख मार्ग ही अंधेरे में डूबे रहें तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी हादसे या अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय निगम को पहले ही चेत जाना चाहिए।
रहवासियों ने नगर निगम से मांग की है कि बंद स्ट्रीट लाइटों को तत्काल चालू कराया जाए, खराब लाइटों की मरम्मत कराई जाए और रात के समय क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई जाए। लोगों का कहना है कि सड़क पर रोशनी सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा की जरूरत है।
अब देखना यह है कि शिकायतों और बढ़ती परेशानी के बाद नगर निगम कब जागता है—या फिर किसी बड़ी घटना के बाद ही इस अंधेरी सड़क की सुध ली जाएगी?
