राजनांदगांव जिले से लगभग 13 किलो मीटर की दुरी ग्राम सुकूलदैहान में इन दिनों अवैध मुरूम उत्खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल कथित रूप से स्थानीय नेताओं के संरक्षण में संचालित हो रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन-रात भारी मशीनों से मुरूम का खनन किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि गांव की सड़कों की हालत भी बदतर हो गई है। अपनी हाईवा से अवैध मुरूम का आवाजाही से धूल और शोर ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध उत्खनन के पीछे प्रभावशाली लोगों का हाथ है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करने से बचता नजर आ रहा है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों के पास गहरी खुदाई से जमीन धंसने का खतरा बढ़ गया है, वहीं बारिश के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। इस पूरे मामले ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत की आशंका को जन्म दिया है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका खामियाजा आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि इस अवैध खनन पर रोक लग सके और गांव को राहत मिल सके।?
राजनांदगांव जिले से लगभग 13 किलो मीटर की दुरी ग्राम सुकूलदैहान में इन दिनों अवैध मुरूम उत्खनन का कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह पूरा खेल कथित रूप से स्थानीय नेताओं के संरक्षण में संचालित हो रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन-रात भारी मशीनों से मुरूम का खनन किया जा रहा है, जिससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि गांव की सड़कों की हालत भी बदतर हो गई है। अपनी हाईवा से अवैध मुरूम का आवाजाही से धूल और शोर ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध उत्खनन के पीछे प्रभावशाली लोगों का हाथ है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करने से बचता नजर आ रहा है। कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों के पास गहरी खुदाई से जमीन धंसने का खतरा बढ़ गया है, वहीं बारिश के मौसम में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। इस पूरे मामले ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मिलीभगत की आशंका को जन्म दिया है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका खामियाजा आने वाले समय में पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है।