खलको मॉडल में ‘हर घर जल’ नहीं, ‘हर घर टल’! ठेकेदारों का रनिंग बिल रोका, अब गलतियां छुपाने दबाव की राजनीति?

 

70% भुगतान के सरकारी निर्देश की अनदेखी, ठेकेदारों पर दबाव, जल जीवन मिशन पर सवाल—क्या PHED में कोई ‘संरक्षण कवच’ काम कर रहा है?

खैरागढ़-
जल जीवन मिशन के तहत “हर घर जल” पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाने के बजाय खैरागढ़ में PHED विभाग की कार्यप्रणाली अब गंभीर सवालों के घेरे में है। कार्यपालन अभियंता प्रदीप खलको पर पहले योजना की धीमी प्रगति और लापरवाही के आरोप लगे, लेकिन अब खबर के असर के बाद मामला और तीखा हो गया है। आरोप है कि अपनी प्रशासनिक कमियों और कार्यगत विफलताओं को छुपाने के लिए अब ठेकेदारों पर गलत दबाव बनाया जा रहा है।
सूत्रों और ठेकेदारों के मुताबिक, शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि कार्य प्रगति के आधार पर ठेकेदारों को 70 प्रतिशत रनिंग बिल का भुगतान किया जाए, ताकि काम प्रभावित न हो। लेकिन खैरागढ़ में हालात उल्टे हैं—यहां ठेकेदारों के वैध भुगतान तक रोक दिए गए हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब ठेकेदारों को भुगतान ही नहीं मिलेगा, तो पाइपलाइन विस्तार और जलापूर्ति के काम आगे कैसे बढ़ेंगे?
आरोप यह भी है कि जो अधिकारी “हर घर पानी” योजना को गति देने के लिए जिम्मेदार है, वही भुगतान रोककर योजना को फ्लॉप करने की जमीन तैयार कर रहा है। इसे लेकर क्षेत्र में व्यंग्य चल पड़ा है कि “यहां पाइपलाइन से ज्यादा फाइलें बह रही हैं, और पानी से ज्यादा भुगतान अटका हुआ है।”
सबसे बड़ा सवाल संरक्षण को लेकर खड़ा हो रहा है। आखिर किसके भरोसे एक अधिकारी शासन के निर्देशों की अनदेखी कर रहा है? क्या किसी संरक्षण के चलते न केवल ठेकेदारों का हक रोका जा रहा है, बल्कि सरकार की मंशा और छवि को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है?
जनप्रतिनिधियों और ठेकेदारों में बढ़ते आक्रोश के बीच अब मांग उठ रही है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की जांच कराए, भुगतान रोकने के कारण सार्वजनिक हों, और यह तय हो कि जल जीवन मिशन को प्यासा बनाने के पीछे जिम्मेदार कौन है। वरना “हर घर जल” का नारा, खैरागढ़ में “हर घर छल” बनकर रह जाएगा।

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