राजनांदगांव ब्लॉक के ग्राम मगरलोटा के आश्रित गांव बिरेझर में स्थित तालाब एक बार फिर चर्चा का
विषय बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां तालाब क्षेत्र से बिना वैध अनुमति और बिना किसी अधिकृत रॉयल्टी/दस्तावेज के मुरूम उत्खनन किया जा रहा है।? गांव के लोगों का कहना है कि जिन जल स्रोतों को संरक्षित किया जाना चाहिए, वहीं अब मशीनों और वाहनों की आवाजाही दिखाई दे रही है। ग्रामीणों के अनुसार, तालाब केवल जल संचयन का साधन नहीं बल्कि खेती, पशुपालन और भूजल स्तर को बनाए रखने का महत्वपूर्ण आधार है। आरोप है कि लगातार मुरूम निकाले जाने से तालाब की मूल संरचना प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में बरसात का पानी ठहरने की क्षमता कम हो सकती है और आसपास के किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी। इससे गांव में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि उत्खनन हो रहा है तो उसकी अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित विभागों की निगरानी कहां है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग, पंचायत और खनिज विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर जांच करे और यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब क्षेत्र को सुरक्षित घोषित कर आगे किसी भी प्रकार के उत्खनन पर रोक लगाने की मांग भी उठाई जा रही है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। लेकिन गांव में बढ़ती चर्चा और लोगों की चिंता यह संकेत दे रही है कि जल स्रोतों की सुरक्षा अब केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्राथमिकता बनती जा रही है।?

विषय बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां तालाब क्षेत्र से बिना वैध अनुमति और बिना किसी अधिकृत रॉयल्टी/दस्तावेज के मुरूम उत्खनन किया जा रहा है।? गांव के लोगों का कहना है कि जिन जल स्रोतों को संरक्षित किया जाना चाहिए, वहीं अब मशीनों और वाहनों की आवाजाही दिखाई दे रही है। ग्रामीणों के अनुसार, तालाब केवल जल संचयन का साधन नहीं बल्कि खेती, पशुपालन और भूजल स्तर को बनाए रखने का महत्वपूर्ण आधार है। आरोप है कि लगातार मुरूम निकाले जाने से तालाब की मूल संरचना प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले समय में बरसात का पानी ठहरने की क्षमता कम हो सकती है और आसपास के किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं दी। इससे गांव में नाराजगी बढ़ रही है। लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि उत्खनन हो रहा है तो उसकी अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित विभागों की निगरानी कहां है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग, पंचायत और खनिज विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंचकर जांच करे और यदि अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही तालाब क्षेत्र को सुरक्षित घोषित कर आगे किसी भी प्रकार के उत्खनन पर रोक लगाने की मांग भी उठाई जा रही है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की ओर से इस मामले में आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। लेकिन गांव में बढ़ती चर्चा और लोगों की चिंता यह संकेत दे रही है कि जल स्रोतों की सुरक्षा अब केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की प्राथमिकता बनती जा रही है।?