राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र में लगातार सामने आ रही वन्यजीवों की मौत, शिकार और संदिग्ध परिस्थितियों में पशु-पक्षियों के शव मिलने की घटनाएं बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण हैं।
कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने इन घटनाओं को वन संरक्षण व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए भाजपा सरकार, वन विभाग और जनप्रतिनिधियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
हाल के दिनों में खैरागढ़-डोंगरगढ़ क्षेत्र में मादा तेंदुए की करंट लगाकर निर्मम हत्या, गंडई क्षेत्र में तेंदुए को जहर देकर मारने की आशंका, कोपेवांगांव-मुढ़ीपार क्षेत्र में संदिग्ध परिस्थितियों में तेंदुए का शव मिलना तथा मोर, कब्रबिज्जू सहित 20 से अधिक वन्यजीवों के शव एक ही स्थान पर पाए जाने जैसी घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है।
ऋषि शास्त्री ने कहा कि यह स्पष्ट संकेत है कि जंगल अब वन्यजीवों के लिए सुरक्षित नहीं रह गए हैं। वन माफिया और शिकारी बेखौफ हैं, जबकि वन विभाग और सरकार केवल औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा सरकार “सुशासन” का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि जंगलों में वन्यजीव तक सुरक्षित नहीं हैं।
उन्होंने राजनांदगांव सांसद संतोष पांडे से सवाल करते हुए पूछा कि आखिर अब तक वन्यजीव संरक्षण को लेकर कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं। साथ ही वन मंत्री केदार कश्यप से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग भी की।
ऋषि शास्त्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण केवल फाइलों का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी पर्यावरणीय विरासत, पारिस्थितिकी संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। यदि समय रहते कठोर और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में जंगलों का अस्तित्व और जैव विविधता दोनों गंभीर संकट में पड़ जाएंगे।
