नगर सहित प्रदेश में प्रधानमंत्री
आवास योजना 2.0 के हजारों हितग्राही संकट में
राजनांदगांव।
प्रदेश सरकार द्वारा “सुशासन तिहार 2025” के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 अंतर्गत हजारों गरीब परिवारों को आवास स्वीकृति पत्र वितरित किए गए थे। मंचों से जल्द राशि जारी कर पक्का मकान निर्माण कराने का भरोसा भी दिलाया गया था, लेकिन वर्ष 2026 आ जाने के बाद भी बड़ी संख्या में हितग्राहियों को पहली किस्त नहीं मिल सकी है।
सरकारी आश्वासन और प्रशासनिक निर्देशों पर भरोसा कर कई गरीब परिवारों ने अपने पुराने कच्चे मकान तोड़ दिए। कई हितग्राहियों ने अपनी जमा-पूंजी खर्च कर दी, तो कई लोगों ने कर्ज लेकर मकान निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया। शासन के निर्देशानुसार किसी ने नींव डलवाई, तो किसी ने डीपीसी तक निर्माण कराया, लेकिन पहली किस्त न मिल पाने से हजारों परिवार आर्थिक संकट में फंस गए हैं।
स्थिति यह है कि कई परिवार आज अधूरे मकानों में तिरपाल और अस्थायी छत के सहारे रहने को मजबूर हैं। गर्मी, बारिश और आंधी के मौसम में छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कर्ज लेकर निर्माण शुरू करने वाले परिवार अब ब्याज और किश्त के दबाव से परेशान हैं।
ऋषि शास्त्री ने मामले को लेकर प्रदेश सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि शासन के पास राशि उपलब्ध नहीं थी, तो गरीब परिवारों को आवास स्वीकृति पत्र बांटकर मकान तोड़ने के लिए क्यों प्रेरित किया गया।उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना को गरीबों के जीवन सुधारने के बजाय राजनीतिक प्रचार और मंचीय आयोजन का माध्यम बना दिया है।
ऋषि शास्त्री ने कहा कि “सुशासन तिहार” की वास्तविकता अब जनता के सामने है। एक ओर सरकार उत्सव और प्रचार में व्यस्त है, वहीं दूसरी ओर गरीब परिवार अधूरे मकानों और आर्थिक संकट के बीच जीवनयापन करने को मजबूर हैं। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के सभी लंबित हितग्राहियों की किस्त तत्काल जारी की जाए तथा निर्माण कार्य में आ रही प्रशासनिक बाधाओं को दूर किया जाए।

आवास योजना 2.0 के हजारों हितग्राही संकट में