पंचगव्य चिकित्सा पर प्रशिक्षण संपन्न

– गौपालन से स्वरोजगार की अपार संभावनाएं

– मध्यप्रदेश, ओडि़शा एवं छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से अभ्यर्थी हुए शामिल

 

राजनांदगांव। महर्षि वाग्भट्ट गौ संवर्धन एवं अनुसंधान संस्थान जिला राजनांदगांव के मार्गदर्शन में संचालित पंचगव्य विद्यापीठम् विस्तार केन्द्र राजनांदगांव में पंचगव्य चिकित्सा, एडवांस डिप्लोमा इन पंचगव्य थेरेपी (एडीपीटी) पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण एवं परीक्षा संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्थान के अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता ने प्रशिक्षणार्थियों को सफलतापूर्वक पंचगव्य चिकित्सा एडीपीटी पाठ्यक्रम का प्रशिक्षण पूरा करने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उन्होंने सभी प्रशिक्षणार्थियों को एक योग्य गव्यसिद्ध चिकित्सक, गौ आधारित जैविक कृषक, स्वदेशी एवं गौ उत्पादक बनकर गाय की उपयोगिता को पुन: स्थापित करने और गाय के महत्ता को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। संस्थान के वरिष्ठ सदस्य आनंद श्रीवास्तव ने कहा कि गाय के बिना स्वदेशी की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। संस्थान के सदस्य एवं समाज सेवक सतीश चंदेले ने गाय और छत्तीसगढ़ी बोली को संरक्षित करने के क्षेत्र में कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि गौपालन से ही गौरक्षा संभव है। भारत को विश्वगुरू बनाने के लिए पुन: घर-घर में गौपालन करना ही होगा।

गव्यसिद्ध आचार्य डॉ. डिलेश्वर साहू ने कहा कि गाय को अर्थ से जोड़ते हुए, गाय के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित कर भारतीय देशी गौवंशों का संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गौपालन से स्वरोजगार की अपार संभावनाएं है। उन्होंने बताया कि पंचगव्य विद्यापीठम् कांचीपुरम् तमिलनाडु द्वारा एडवांस डिप्लोमा इन पंचगव्य थेरेपी (एडीपीटी) का संचालन किया जा रहा है। भारत सरकार के संसदीय बोर्ड अंतर्गत आने वाले भारत सेवक समाज (बीएसएस) द्वारा मान्यता प्राप्त एक व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम है। एडीपीटी कोर्स के तहत पंचगव्य व वनस्पतियों से विभिन्न तरह की भोज्यौषधियों का निर्माण, गौशाला प्रबंधन, मनुष्य एवं गाय की चिकित्सा, गौ आधारित जैविक कृषि, मार्केटिंग मैनेजमेंट विषय पर एक वर्षीय पाठ्यक्रम एवं एक वर्ष का अभ्यास कराया जाता है। प्रशिक्षणार्थियों को सदस्य अपूर्वा प्रधान, पुरूषोत्तम देवांगन, प्रज्ञानंद मौर्य, तनीष साहू ने भी संबोधित किया। साथ ही प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। प्रशिक्षण में मुंगेली से भुनेश्वर राजपूत, रायपुर से दिलीप साहू एवं हरनारायण यदु, डोंगरगांव से झनक लाल साहू, राजनांदगांव से मोनिका साहू, राकेश सोनी एवं जितेन्द्र साहू, बालोद से केशरीकांत साहू, दुर्ग मनीषा यादव, धमधा से प्रिया पटेल, जामुल से राजूराम केवट, छुईखदान से स्नेहिल श्रीवास्तव शामिल हुए। इसी तरह ओडि़शा से डॉ. ममता शुक्ला, बालाघाट से संगीता श्रवण टेमरे, जबलपुर से रामबिहारी तिवारी, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी से सौरभ साहू एवं टेमांशु साहू, बालोद से डेमन यादव एवं ऋषि कुमार, दल्ली राजहरा से गौरव साहू, धमतरी से यामिनी साहू परीक्षार्थी शामिल हुए।

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