
राजनांदगांव। संस्कारधानी का वार्ड नंबर 4, नया ढाबा इलाका, आज भी अंधेरे के साए में जीने को मजबूर है। जनता लगातार सवाल उठा रही है, आंदोलन की चेतावनी दे रही है – लेकिन जिम्मेदारों के पास जवाब के नाम पर सिर्फ बहाने हैं।
दरअसल, जब पार्षद से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा – “मैंने 40 लाइट नगर निगम में मरम्मत के लिए दी हैं, लाइट आएगी तभी लग पाएगी।”
अब जनता पूछ रही है – “क्या जनता को तब तक अंधेरे में कैद रहना पड़ेगा जब तक लाइट वापस नहीं आती? क्या पार्षद का काम सिर्फ लाइट भेजना है या उसकी व्यवस्था करना भी उनकी जिम्मेदारी है?”
लोगों का आरोप है कि यह सिर्फ जिम्मेदारी से बचने का तरीका है। वार्ड की महिलाएं कह रही हैं – “अगर 40 लाइट मरम्मत में हैं तो क्या पार्षद के पास कोई और विकल्प नहीं था? आखिर हमारी सुरक्षा किसके भरोसे है?”
युवा वर्ग खुलकर कह रहा है कि पार्षद सिर्फ बहाने बना रहे हैं। “जनता ने वोट दिए थे समस्या का समाधान करने के लिए, न कि अंधेरे में डुबोने के लिए। अगर इतनी ही लाचारी है तो इस्तीफा देना चाहिए।”
वहीं, नगर निगम पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोग तंज कसते हैं – “फाइलों और बयानबाजी में रोशनी है, लेकिन सड़कों पर अंधेरा ही अंधेरा है।”
माहौल साफ बता रहा है कि वार्ड 4 की जनता अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है। सवाल उठ रहा है कि आखिर कब तक “40 लाइट” का बहाना देकर जनता की आवाज दबाई जाएगी?
