शिवनाथ नदी में श्रावणी पर्व व हेमाद्रि संकल्प के लिए लगी आस्था की डूबी

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच‌ हुआ पवित्र दस स्नान,,यज्ञ- हवन कार्यक्रम हुए आयोजित

 राजनांदगांव / श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में एक गायत्री शक्तिपीठ द्वारा शिवनाथ नदी में हेमाद्रि संकल्प व पवित्र दस स्नान का आयोजन किया गया। प्रातः 6 बजे से आयोजित उक्त कार्यक्रम में गायत्री परिजनो द्वारा नदी में आस्था की डूबकी लगाते हुए दूध- दही, घी शहद, हल्दी, गोमय औषधि गो-मूत्र, कुशा आदि से पवित्र दस स्नान किया गया और शुद्धिकरण के पश्चात नदी तट में वैदिक मन्त्रोच्चार के बीच गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया। जिसमें शक्तिपीठ के पुरोहित सुखनंदन जी द्वारा उच्चारण वेद मंत्रों के बीच शक्तिपीठ के वरिष्ठ मुरलीधर चौधरी, सालिकराम, मोहन भाई पटेल व्यास नारायण कौशिक ,डॉ दुलेश्वर साहू, हरिश गांधी ,टिकेंद्र ठाकुर भरत देवांगन, गोपाल राम, रमेश च्यवन,पीतांबर सेन,मिलन , केशव

देवांगन, टीकेश ,नूतन,पंकज, मोती लाल,योगेश साहू, धर्मेंद्र आदि सहित बड़ी संख्या में गायत्री परिजनो द्वारा अपने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए श्रद्धा पूर्वक श्राद्ध तर्पण किया गया। तत्पश्चात नदी तट में आयोजित यज्ञ-हवन में आहूतियां प्रदान की गई। इस दौरान मोहरा नदी तट में वैदिक मन्त्रों की गूंज बनी रही।

*कार्यक्रम में संपन्न हुए प्रमुख अनुष्ठान*

 गायत्री शक्तिपीठ के मुख्य ट्रस्टी सूर्यकांत चितलांग्या व निर्माण ट्रस्टी बृजकिशोर सुरजन ने श्रावणी पर्व व भाई- बहनों के पवित्र प्रेम के प्रतीक पर्व रक्षाबंधन की सबको बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि श्रावणी पर्व के दिन इस हमारी सृष्टि का प्रादुर्भाव हुआ था। ब्रह्म को एक अकेला रहना नहीं भाया और उनकी एकोह्म बहुश्याम की स्फुरणा मात्र से वे एक से अनेक होते चले गए। उन्होंने प्रकृति की चारों ओर फैली हरियाली को इस बात का प्रतीक बताया । ट्रस्टी द्वय ने बताया कि शिवनाथ नदी में पवित्र दस स्नान कर जहां परिजनों द्वारा शारीरिक एवं मानसिक शुद्धि का संकल्प लिया गया वहीं देश समाज व परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारी, स्वच्छता, पर्यावरण व समाज मे सद्भाव बढ़ाने आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने की हेमाद्रि संकल्प भी ली गई और पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री राम शर्मा जी का संदेश आत्मसात करते हुए उसे जन-जन तक पहुंचाए जाने की बात कही गई। इस दौरान उपस्थित परिजनों ने सृष्टि के उक्त प्रादुर्भाव काल को याद करते हुए जहां एक ओर व्यक्ति के जीवन में आत्मिक शुद्धि एवं नव जीवन की आचार-विचार परिवर्तन हेतु नदी सरोवरों में दस स्नान कर मनाया गया वहीं प्रकृति के चारो ओर हरियाली बिखेरने के लिए पौधरोपण का भी संकल्प लिया गया और नदी तट पर पौध रोपण किया गया।

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