कस्तूरबा महिला मंडल द्वारा संत कवि तुलसीदास को किया गया याद ,,संस्था संबंधित की
गई चर्चा
राजनांदगांव / शहर की समाज सेवी महिलाओं की सबसे पुरानी संस्था कस्तूरबा महिला मंडल में संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई गई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से किसान नेता व समाज सेवी अशोक चौधरी, गायत्री शक्तिपीठ के बृजकिशोर सुरजन, लायंस क्लब सिटी राजनांदगांव के अध्यक्ष अमित खंडेलवाल उपस्थित थे।
कस्तूरबा महिला मंडल की संस्थापक संयोजक व संरक्षिका श्रीमती सरस्वती माहेश्वरी , श्रीमती शारदा तिवारी, अध्यक्ष श्रीमती अलका जानी,आशा गुप्ता,शोभा चोपड़ा ,अनिता जैन, साधना तिवारी,माया चौरसिया, विद्या पांडे आदि ने अतिथि के साथ मिलकर संत कवि गोस्वामी तुलसीदास जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलन कर श्री राम चरित मानस के रचयिता को कृतज्ञता पूर्वक याद किया। मुख्य अतिथि अशोक चौधरी ने कहा कि हम भारत वासी जिस सनातन संस्कृति और मर्यादा को जी रहे हैं उसके पीछे तुलसी दास जी की श्री रामचरित मानस का बहुत बड़ा हाथ है। श्री तुलसी दास जी समन्वय वादी कवि हैं। उन्होंने- शिव द्रोही मम दास कहावा,,ते नर मोही,सपनेहु नहीं भावा ।। कहते हुए भगवान श्री राम व शिव सहित शैव व शाक्त ,सगुन – निर्गुण, लोक व शिष्ट तथा सभी संप्रदायों के विचारों का अपनी कृति में समन्वय कर अद्भुत ग्रंथ प्रस्तुत किया है।
*तुलसीदास जी का मानस ग्रंथ समाज के लिए प्रकाश स्तंभ*
कार्यक्रम में विशेष रुप से उपस्थित गायत्री शक्तिपीठ के बृजकिशोर सुरजन ने श्री रामचरित मानस के चितेरे महाकवि तुलसीदास जी को नमन करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं समाज के लिए प्रकाश स्तंभ है। लायंस क्लब के अध्यक्ष अमित खंडेलवाल ने कहा कि मध्यकाल में जब चारों और घोर अंधेरा व्याप्त था तब श्री रामचरित मानस के माध्यम से तुलसी दास जी ने लोगों को उजाला दी।
इस दौरान माया रानी चौरसिया ने संत कवि तुलसीदास के जीवन का सुंदर गान किया। वहीं समाज सेवी व अधिवक्ता श्रीमती शारदा तिवारी ने कहा कि तुलसी दास जी ने एक राजा कैसे होने चाहिए और दैहिक दैविक भौतिक तापा , रामराज्य काहू नहीं ब्यापा वाली व्यवस्था होनी चाहिए के संबंध में अपनी कृति में उन्होंने बताया है। इस अवसर पर समाज सेवी श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता,उषा मिश्रा ,नियामत हुड्डा,जनक बाई गुप्ता आदि सहित कस्तूरबा स्कूल के प्राचार्य प्रवीण गुप्ता, ईश्वर साहू,विकाश बारामाटे ,सीताराम वैष्णव आदि ने हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया । इस दौरान उपस्थितों द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की धर्म पत्नी कस्तूरबा के नाम से संचालित इस संस्था का बेहतर ढंग से संचालन किस तरह हो इस पर विस्तृत चर्चा की गई। अंत में संत कवि तुलसीदास दास जी की जयंती पर उपस्थितो में प्रसादी वितरण किया गया।
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