जनता ने विकास के लिए त्याग किया, अब भेदभाव और न्यायालयीन आदेश पर जवाब दे सरकार

सड़क की चौड़ाई पर राजनीतिक बयान नहीं,जिम्मेदारी निभाए वरिष्ठ सभापति भाजपा नेत्री: ऋषि शास्त्री

राजनांदगांव। वार्ड क्रमांक 42-43 में क्लब चौक बसंतपुर से गुजराती स्कूल होते हुए गौरव पथ तक प्रस्तावित सड़क चौड़ीकरण का मामला अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर सड़क की वास्तविक चौड़ाई, सीमांकन, प्रभावित भूमि और न्यायालयीन आदेश के पालन से जुड़े सवालों पर केंद्रित हो गया है। पूर्व पार्षद एवं युवा नेता ऋषि शास्त्री ने कहा कि क्षेत्र की जनता ने विकास के लिए जमीन और वर्षों की असुविधा का त्याग किया है। ऐसे में निर्माण कार्य में समानता, पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना नगर निगम एवं शासन की जिम्मेदारी है।

जनता ने जमीन दी तो भेदभाव क्यों?

शास्त्री ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रभावित नागरिकों ने व्यापक जनहित में सहयोग किया है। ऐसे में यदि मार्ग के अलग-अलग हिस्सों में सड़क की चौड़ाई अलग रखी जा रही है, तो नगर निगम को इसका स्पष्ट तकनीकी और वैधानिक आधार जनता के सामने रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि सड़क की सीमा या चौड़ाई में कोई संशोधन किया गया है तो उससे संबंधित स्वीकृति, संशोधित ड्राइंग, तकनीकी स्वीकृति और सक्षम प्राधिकारी के आदेश सार्वजनिक किए जाने चाहिए।

हाईकोर्ट के आदेश का पालन हुआ या नहीं, निगम स्पष्ट करे

ऋषि शास्त्री ने 9 नवंबर 2020 के उच्च न्यायालय के आदेश के संदर्भ में संबंधित भूमि, सीमांकन और वैधानिक प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि उक्त आदेश में सड़क, भूमि, सीमांकन अथवा प्रशासनिक कार्रवाई के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं, तो नगर निगम और संबंधित अधिकारियों को यह बताना चाहिए कि उन निर्देशों का पालन कब और किस प्रकार किया गया।उन्होंने सवाल उठाया कि संबंधित भूमि का सीमांकन कब और किस आधार पर किया गया? सड़क की सीमा किस तकनीकी दस्तावेज के आधार पर निर्धारित की गई? प्रभावित भूमि के संबंध में क्या वैधानिक कार्रवाई की गई? जहां निजी भूमि की आवश्यकता थी, वहां मुआवजा अथवा अन्य कानूनी प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति क्या है?

आदेश की अवहेलना हुई तो जवाबदेही तय हो

शास्त्री ने कहा कि यदि न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद उसके विपरीत कोई कार्रवाई की गई है या आदेश के अनुपालन में जानबूझकर लापरवाही बरती गई है, तो यह गंभीर न्यायालयीन विषय है। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही और न्यायालय के समक्ष स्थिति स्पष्ट किए जाने का प्रश्न उठता है।उन्होंने कहा कि सरकार और नगर निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि न्यायालयीन आदेश की प्रत्येक शर्त का पालन किस दस्तावेज और किस कार्रवाई के माध्यम से किया गया। यदि आदेश के अनुपालन को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान भी आधिकारिक रिकॉर्ड और न्यायालयीन प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाजी के जरिए।

25 फीट स्वीकृत है तो अलग-अलग चौड़ाई क्यों?

शास्त्री ने कहा कि यदि सड़क की स्वीकृत चौड़ाई 25 फीट है तो पूरे मार्ग में इसकी स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। यदि किसी हिस्से में 25 फीट और दूसरे हिस्से में 18, 20 या 22 फीट चौड़ाई रखी जा रही है, तो उसके पीछे का तकनीकी आधार जनता को बताया जाना चाहिए।उन्होंने पूछा कि क्या इसके लिए संशोधित ड्राइंग, तकनीकी स्वीकृति अथवा सक्षम प्राधिकारी का कोई आदेश जारी हुआ है? यदि ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

राजनीतिक श्रेय नहीं, दस्तावेजों से मिले जवाब

वरिष्ठ सभापति भाजपा पार्षद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शास्त्री ने कहा कि किस सरकार के समय राशि स्वीकृत हुई, किस जनप्रतिनिधि ने अधिकारियों से मुलाकात की या किसने निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया, यह राजनीतिक चर्चा का विषय हो सकता है। लेकिन जनता का मूल सवाल सड़क की वास्तविक चौड़ाई, सीमांकन, प्रभावित जमीन और न्यायालयीन आदेश के पालन को लेकर है।उन्होंने कहा, “सड़क की चौड़ाई राजनीतिक बयान से नहीं बढ़ती, उसके लिए स्वीकृत ड्राइंग और तकनीकी आदेश जरूरी होते हैं। जनता के सवालों का जवाब भी बयान से नहीं, सरकारी दस्तावेजों से दिया जाना चाहिए।”

पूरे दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

शास्त्री ने नगर निगम प्रशासन से सड़क की स्वीकृत ड्राइंग, तकनीकी स्वीकृति, सीमांकन रिपोर्ट, संबंधित भूमि की स्थिति, भूमि अधिग्रहण अथवा मुआवजा संबंधी कार्रवाई, न्यायालयीन आदेश के अनुपालन से जुड़े रिकॉर्ड तथा वर्तमान निर्माण में प्रस्तावित चौड़ाई से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।उन्होंने कहा कि जनता ने विकास के लिए त्याग किया है, इसलिए अब जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके त्याग के बदले सड़क का निर्माण किस स्वीकृत मापदंड के अनुसार हो रहा है। यदि कहीं भेदभाव, अनियमितता या न्यायालयीन आदेश के अनुपालन में कमी है, तो सरकार को उसका स्पष्ट जवाब देना चाहिए।उन्होंने कहा कि विकास कार्य किसी व्यक्ति या दल के श्रेय का विषय नहीं, बल्कि जनता के हित और पारदर्शी प्रक्रिया का विषय है। दस्तावेज सामने आने के बाद जनता स्वयं यह देख सकेगी कि सड़क निर्माण में स्वीकृत मापदंड, सीमांकन और न्यायालयीन निर्देशों का

पालन किस प्रकार किया गया है।

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