धार्मिक आयोजन के बीच पूर्व महापौर नरेश डाकलिया का मनाया गया जन्मदिन,,,,पूजन कार्यक्रम में उमड़ी समाजसेवी महिलाएं
राजनांदगांव / श्रावण शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को कस्तूरबा महिला मंडल द्वारा शहर की समाजसेवी महिलाओं के साथ भगवान शिव की पार्थिव पूजन का आयोजन किया गया। पं० मोहन शास्त्री के वैदिक मन्त्रोंच्चार के बीच आयोजित इस अनुष्ठानिक आयोजन में यजमान द्वय श्रीमती टीना अमीत खंडेलवाल,व श्रीमती उषा अजय मिश्रा सहित उपस्थित बड़ी संख्या में समाज सेवी महिलाओं ने भगवान शिव के पार्थिव लिंग का गंगा जल दुग्ध केवड़ा जल आदि अर्पित कर पूरे मनोयोग से रुद्राभिषेक किया । कस्तूरबा महिला मंडल की संरक्षिका श्रीमती शारदा तिवारी के संयोजकत्व में आयोजित इस अनुष्ठानिक कार्यक्रम में महापौर मधुसूदन यादव की धर्मपत्नी श्रीमती करुणा यादव, कस्तूरबा की अध्यक्ष श्रीमती अलका जानी, सचिव श्रीमती साधना तिवारी,आशा गुप्ता, शौभा चोपड़ा,अनिता जैन, माया अग्रवाल, शोभा रानी चौरसिया, लक्ष्मी गुप्ता,पुष्पा सोनी,हेमा गुप्ता, जनक बाई आदि सहित बड़ी संख्या में समाजसेवी महिलाएं उपस्थित थे।
शिव रुद्राभिषेक पूजा के बीच में पहुंचे नगर के पूर्व महापौर नरेश डाकलिया का जन्म दिन हैप्पी बर्थडे गान के साथ मनाया गया। इस दौरान वरिष्ठ समाजसेवी श्रीमती सरस्वती माहेश्वरी, शारदा तिवारी, साधना तिवारी आदि द्वारा श्री डाकलिया का पुष्प गुच्छ भेंट कर स्वागत किया वहीं पूजा आयोजन में यजमान बने लायन्स क्लब राजनांदगांव सिटी के अध्यक्ष अमीत खंडेलवाल द्वारा श्री डाकलिया का मुंह मीठा कर समस्त समाजसेवी महिलाओं के साथ उन्हें जन्म दिन की बधाई एवं शुभकामनाएं दी गई।
*मां गौरी का किया गया सोलह श्रृंगार*
कस्तूरबा भवन में आयोजित पार्थिव शिव लिंग पूजन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समाज सेवी महिलाओं ने मां गौरी अंबे,भवानी की हल्दी कुंकुम, चूड़ियां,महावर, आदि सहित सौंदर्य प्रसाधन की सामग्रियां अर्पित कर मातारानी का सोलह श्रृंगार किया गया, वहीं भगवान शिव में बेलपत्र, धतुरा, केवड़ा जल , गंगा जल, व दूध – दही चढ़ाकर पूरे मनोयोग से भगवान भोलेनाथ की पंचोपचार पूजा -अर्चना की और नगरवासियों की सुख- शांति और खुशहाली की दुआएं मांगी। इस दौरान महाकाल सेना के राजेश डागा,सनातन धर्म महासभा के संतोष पटाक, कस्तूरबा के प्राचार्य प्रवीण गुप्ता, व्यवस्था प्रभारी सीताराम वैष्णव,ईश्वर साहू गौड़ ब्राह्मण समाज की महिलाएं, कसौधन वैश्य समाज की महिलाएं व स्कूल की शिक्षिकाओं सहित बड़ी संख्या में सनातन धर्मानुरागी महिलाएं उपस्थित थीं।
