पुरेना में राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया गया

खैरागढ़ छुईखदान गण्डई _शासकीय प्राथमिक शाला पुरेना संकुल केन्द्र घिरघोली विकास खंड छुईखदान जिला केसीजी छत्तीसगढ़ में बारह जनवरी दो छब्बीस को राष्ट्रीय युवा दिवस स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाई गई।प्रधान पाठक तुलेश्वर कुमार सेन और सहायक शिक्षक गोकुल राम वर्मा के मार्गदर्शन में दोपहर भोजन अवकाश पश्चात शाला परिसर में सभी बच्चों की उपस्थिति में स्वामी विवेकानंद जी की पूजा अर्चना किया गया उसके बाद प्रधान पाठक तुलेश्वर कुमार सेन ने स्वामी विवेकानंद जी की संक्षिप्त जीवनी को बताया साथ उनके जीवन की कुछ प्रमुख संस्मरणों को बताया कि स्वामी जी नरेंद्र नाथ से स्वामी विवेकानंद जी कैसे बन गए ….?उन्हें विवेकानंद क्यों कहा गया…..? उनके गुरु रामकृष्ण परम हंस और माता शारदा देवी की कौन थी उसके बारे में बताया गया।किस प्रकार ईश्वर की खोज में भटक रहे थे।अमरीका के शिकागो की धर्म सभा शिखर सम्मेलन में जहां सभी देशों और विदेशों के लोग अपनी_ अपनी धर्म संस्कृति संस्कार की डंका बजाने आए थे धर्म के ज्ञाता लोग अपनी अपनी बातें रख रहे थे वहां पर इसे एक अबोध बालक समझकर ये बालक क्या बोलेगा भारतीय संस्कृति के बारे में क्या बताए गा ऐसा सोच करके उन्हें मात्र कुछ समय ही दिया गया था परंतु स्वामी विवेकानंद जी ने अपनी उद्बोधन की शुरुवात में मात्र इतना ही कहा कि मेरे प्यारे बहनों और भाइयों सम्बोधन सुनकर इतनी तालियों कि गड़गड़ाहट बजी जिसकी किसी ने कोई कल्पना तक नहीं किए थे और उसके बाद लगातार बोलते रहे।आज लगभग डेढ़ सौ साल बाद भी हम लोग उनको याद कर रहे हैं।आप सभी लोग भी बढ़िया से पढ़े लिखे अपना स्वयं,परिवार, समाज राज्य और देश का नाम रौशन करे।स्वामी विवेकानंद जी अपने आप को भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए बताते हैं कि सिर से पैर तक भारत हूँ ।मेरा सर उत्तर दिशा हिमालय की चोटी है दक्षिण दिशा मेरा पैर हिंद महासागर और मेरी दोनों भुजाएं कच्छ और बंगाल की खाड़ी है।मेरे हृदय में संपूर्ण भारत है।हमरा भारत विश्व गुरु है।पूरा विश्व भारत के बताएं रास्तों पर चलेगा।स्वामी जी भगवा रंग पहना करते थे जो हमारे चरित्र को दर्शाता है।एक अंग्रेजी लेडी विवाह का प्रस्ताव रखे कारण बताया कि आपकी तरह मेरा पुत्र होगा तो मुझे गर्व होगा तब उन्होंने कहा इसकी क्या जरूरत है आप मेरी मां बन जाए इसी तरह की बहुत सी घटना क्रम है।स्वामी विवेकानंद जी हमारे रायपुर के बुढ़ा तालाब के आसपास निवास किए थे जिसे आज विवेकानंद सरोवर की रूप में जानते हैं।उन्होंने राम कृष्ण परमहंस की स्थापना किए थे सहायक शिक्षक गोकुल राम वर्मा ने भी अपने विचार रखे आज के कार्यक्रम में छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।प्रधान पाठक तुलेश्वर कुमार सेन ने अपनी कविता भी सुनाए।

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