राजनांदगांव। संस्कारधानी राजनांदगांव के दिग्विजय स्टेडियम में 15 अक्टूबर को डॉ. रमन सिंह का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। आयोजन में उत्साह और जश्न का माहौल रहा, लेकिन दूसरी ओर प्रवेश व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। आरोप है कि हाथ में पास लेकर पत्नी और बच्चों के साथ पहुंचे लोगों को भी अंदर जाने से रोक दिया गया। अपने चहेते नेता को जन्मदिन की बधाई देने पहुंचे परिवारों को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पास जारी करने का औचित्य क्या था, जब पासधारकों को ही प्रवेश नहीं मिल सका?
पुलिस तैनात थी, तो बाउंसरों की जरूरत क्यों?
कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात होने के बावजूद बाउंसरों की मौजूदगी चर्चा का विषय बन गई। सवाल यह है कि जब पुलिस प्रशासन सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा था, तो अतिरिक्त बाउंसरों को तैनात करने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या आयोजकों को पुलिस की व्यवस्था पर भरोसा नहीं था, या फिर प्रवेश व्यवस्था के लिए अलग इंतजाम किए गए थे? बाउंसरों की वास्तविक भूमिका क्या थी और प्रवेश के लिए पास लेकर पहुंचे लोगों को किस आधार पर रोका गया? इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
पास जेब में नहीं, हाथ में था; फिर भी लौटे लोग!
जन्मदिन जैसे आयोजन में अपने नेता को बधाई देने की उम्मीद लेकर पहुंचे लोगों के लिए प्रवेश नहीं मिलना निराशाजनक रहा। खासकर पत्नी और बच्चों के साथ पहुंचे परिवारों को बाहर से ही वापस लौटना पड़ा, ऐसा आरोप लगाया गया है। जब किसी व्यक्ति को पास दिया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से उसे प्रवेश मिलने की उम्मीद रहती है। यदि प्रवेश को लेकर कोई विशेष नियम या प्रतिबंध था, तो इसकी जानकारी पहले ही क्यों नहीं दी गई? आखिर पासधारकों को रोकने की वजह क्या थी? आयोजन की व्यवस्था संभालने वालों को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।
स्टेडियम में आयोजन, सड़क पर पार्किंग का दबाव!
कार्यक्रम के दौरान पार्किंग व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। आरोप है कि वाहन सड़क पर खड़े होने के कारण लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा और यातायात प्रभावित हुआ। ऐसे में सवाल उठता है कि बड़े आयोजन से पहले पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अगर दिग्विजय स्टेडियम में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं, तब प्रशासन किस तरह की पार्किंग और यातायात किस तरह की प्रबंधन करेगी ?
बड़े आयोजनों में भीड़ जुटना स्वाभाविक है, लेकिन भीड़ के साथ यातायात और पार्किंग का दबाव भी बढ़ता है। ऐसे में आयोजकों और संबंधित प्रशासनिक अमले की जिम्मेदारी बनती है कि आम नागरिकों को आवागमन में परेशानी न हो।
जश्न के बीच जनता के सम्मान का सवाल
डॉ. रमन सिंह का जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया गया, लेकिन प्रवेश और पार्किंग व्यवस्था को लेकर उठे सवाल आयोजन की तैयारियों पर चर्चा को जन्म दे रहे हैं। सुरक्षा जरूरी है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर पासधारकों को प्रवेश से वंचित किए जाने के आरोप भी गंभीर हैं। इसी तरह, किसी बड़े आयोजन के कारण आम रास्तों पर यातायात प्रभावित होता है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
अब सवाल यह है कि पास होने के बावजूद लोगों को प्रवेश क्यों नहीं मिला? पुलिस की मौजूदगी में बाउंसरों की भूमिका क्या थी? और सड़क पर खड़े वाहनों से यातायात प्रभावित होने की स्थिति क्यों बनी?
आयोजकों और संबंधित प्रशासन को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे आयोजनों में सुरक्षा के साथ-साथ आम जनता की सुविधा और सम्मान का भी पूरा ध्यान रखा जा सके?
