रायपुर। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की भूख मिटाने के लिए समोसा, आलू गुंडा और बड़ा तो जमकर बिक रहा है, लेकिन इन खाद्य पदार्थों को देखकर स्वच्छता व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। नाश्ते को साफ-सुथरे कवर से ढकने के बजाय कथित तौर पर गंदे कंबल से ढककर रखा जा रहा है।
जिस जगह हजारों यात्रियों की आवाजाही होती है, उसी स्टेशन परिसर में खाद्य सामग्री की ऐसी तस्वीरें सामने आना जिम्मेदारों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाता है। आखिर यात्रियों को नाश्ता खिलाया जा रहा है या गंदगी परोसी जा रही है?
समोसा, आलू गुंडा और बड़ा जैसे खाद्य पदार्थ लंबे समय तक खुले या अस्वच्छ तरीके से रखे जाएं तो धूल-मिट्टी और अन्य गंदगी के संपर्क में आने की आशंका रहती है। ऐसे में यात्रियों को बीमारी का खतरा हो सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह चिंता का विषय बन सकता है।
गंदा कंबल बना ‘फूड कवर’, जिम्मेदार कहां?
खाद्य सामग्री को ढकने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कंबल की साफ-सफाई पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिस कंबल का इस्तेमाल यात्रियों के सोने या सामान ढकने में किया जाता है, उसी तरह के गंदे कपड़े से खाने-पीने की चीजें ढकना खाद्य सुरक्षा के लिहाज से कितना उचित है? यह जांच का विषय है।
अब सवाल सीधे जिम्मेदारों से है—क्या स्टेशन परिसर में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की नियमित जांच होती है? क्या विक्रेताओं को स्वच्छता के नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी किसी अधिकारी की नहीं है?
यात्रियों की मांग है कि रेलवे स्टेशन परिसर में खाद्य सामग्री की बिक्री और साफ-सफाई की तत्काल जांच हो। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए, ताकि यात्रियों की सेहत के साथ किसी तरह का समझौता न हो।?
रेलवे स्टेशन पर नाश्ता तो बिक रहा है, लेकिन सवाल यह है—नाश्ते के साथ यात्रियों को स्वच्छता मिल रही है या बीमारी का खतरा?
