डोंगरगांव ब्लॉक के ग्राम बीजाभाठा में तालाब गहरीकरण के नाम पर हुए कथित मुरूम खेल ने अब पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों और रसूखदार नेताओं के
संरक्षण में तालाब को 12 से 15 फीट तक खोद दिया गया, जिससे भारी मात्रा में मुरूम निकाला गया। इतना ही नहीं, तालाब के आसपास के कई खेतों को भी नहीं छोड़ा गया और वहां से भी मुरूम निकालने का काम धड़ल्ले से चलता रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि जल संरक्षण और तालाब सौंदर्यीकरण की आड़ में असल खेल मुरूम उत्खनन का था। रात-दिन जेसीबी मशीनें चलती रहीं, हाईवा में भरकर मुरूम बाहर भेजा जाता रहा, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने कभी मौके पर जाकर जांच करना जरूरी नहीं समझा। गांव में चर्चा है कि पूरा काम राजनीतिक संरक्षण में होने के कारण अधिकारियों ने भी आंखें मूंदे रखीं।
स्थानीय किसानों का आरोप है कि खेतों की उपजाऊ जमीन तक खोद डाली गई, जिससे खेती प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। कई जगहों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनसे हादसे की आशंका भी बनी हुई है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि आखिर तालाब गहरीकरण के लिए कितनी खुदाई की अनुमति थी? यदि सिर्फ विकास कार्य होना था तो खेतों से मुरूम निकालने की जरूरत क्यों पड़ी?
गांव में यह भी चर्चा है कि लाखों रुपए के मुरूम की निकासी हुई, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में वास्तविक मात्रा का कहीं उल्लेख नहीं है। लोगों का आरोप है कि नेताओं, ठेकेदारों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से पूरा खेल संचालित किया गया।
अब ग्रामीणों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो तालाब गहरीकरण के नाम पर हुए बड़े घोटाले और राजनीतिक संरक्षण की परतें खुल सकती हैं। बीजाभाठा का तालाब अब पानी से ज्यादा “मुरूम माफिया” और राजनीतिक संरक्षण को लेकर सुर्खियों में है।?
संरक्षण में तालाब को 12 से 15 फीट तक खोद दिया गया, जिससे भारी मात्रा में मुरूम निकाला गया। इतना ही नहीं, तालाब के आसपास के कई खेतों को भी नहीं छोड़ा गया और वहां से भी मुरूम निकालने का काम धड़ल्ले से चलता रहा।