राजनांदगांव।
शिवनाथ वाटिका, लखोली नाका में संस्कारधानी गरबा उत्सव समिति ने भक्तों से 150 रुपये का पास वसूलकर जेबें तो भर लीं, लेकिन पार्किंग, ट्रैफिक और सुरक्षा जैसी बुनियादी जिम्मेदारियों को भगवान भरोसे छोड़ दिया।
गरबा मैदान के बाहर सड़कें ऐसी जाम हुईं कि भक्तों को नाचने से पहले अपनी गाड़ियों को बचाने का ‘गरबा’ करना पड़ा। चारों तरफ बाइक-कारों की अनियंत्रित कतारें और प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी मानो नवरात्रि पर ‘गायब होने का व्रत’ रख चुके हों।
लोगों ने तंज कसते हुए कहा – “150 रुपये लेकर टिकट तो काट लिए, पर सफाई, सुरक्षा और पार्किंग का हिसाब किसके पास है? जनता को आस्था दिखाने आई है या अव्यवस्था सहने?”
कानून कहता है निजी आयोजन में शुल्क लिया जा सकता है, मगर उसके बदले सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। यहां तो हालात ऐसे हैं जैसे समिति ने भक्ति को ‘कमाई का धंधा’ और प्रशासन ने जाम को ‘नवरात्रि की परंपरा’ मान लिया हो।
संस्कारधानी में इस बार गरबा का मतलब निकल आया है – “भक्ति नहीं, भरस्ट व्यवस्था; उत्सव नहीं, अंधी लापरवाही।”
