राजनांदगांव में ज़बरदस्ती सीमांकन का मामला गरमाया: विदेश में रह रहे हिस्सेदारों की बिना सहमति कार्रवाई, परिवार ने चेताया “धरना देंगे, न्याय नहीं तो आंदोलन!”

राजनांदगांव तहसील में एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। रेवाड़ीह वार्ड की एक विवादित भूमि को लेकर सीमांकन की ऐसी कार्रवाई की जा रही है, जिसे लेकर हिस्सेदारों ने तीव्र आपत्ति जताई है। खास बात यह है कि ज़मीन के प्रमुख हिस्सेदारों में से बलवंत सिंह जोहेल और अन्य सदस्य इस समय कनाडा में निवासरत हैं, और उन्होंने कनाडा से नोटरी कराया आवेदन लिखित रूप से पेश किया था कि उनके बिना किसी भी प्रकार का सीमांकन या बंटवारा न किया जाए।

“बंटवारे से एतराज़ नहीं, लेकिन प्रक्रिया हो पारदर्शी और हमारी मौजूदगी में”

बलवंत सिंह जोहल का कहना है कि वे और उनके परिवार के अन्य सदस्य दिसंबर 2025 में भारत लौटने वाले हैं, और वे चाहते हैं कि यह कार्रवाई उनकी उपस्थिति में की जाए। इसके लिए उन्होंने बाकायदा आवेदन देकर अनुमति भी मांगी है, ताकि अपनी संपत्ति की रक्षा कर सकें।

परिवार का आरोप: “प्रशासन एकतरफा कार्यवाही कर रहा है

पीड़ित परिवार का दावा है कि तहसील कार्यालय के कुछ अधिकारी केवल एक पक्ष की सहमति के आधार पर ज़बरदस्ती सीमांकन की कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि जमीन पर विवाद पहले से मौजूद है और मामला अभी कानूनी रूप से खुला है।

“भ्रष्टाचार और दबाव में हो रही कार्यवाही”

परिवार ने प्रशासन पर पक्षपात और भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस मामले में अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका सामने आ रही है। उनका दावा है कि बंटवारे की प्रक्रिया में कुछ अधिकारी कर्मचारी द्वारा पक्षपात व्यवहार किया जा रहा है
कानूनी पक्ष क्या कहता है? भारतीय भू-राजस्व संहिता की धाराएं स्पष्ट करती हैं कि जब तक सभी हिस्सेदारों की सहमति न हो या न्यायालय से आदेश न मिले, किसी भी भूमि का सीमांकन या बंटवारा अवैध माना जाएगा। ऐसे में प्रशासन की यह जल्दबाज़ी संदेह को और गहरा करती है।
प्रशासन का जवाब: “सब कुछ नियमों के तहत”
इस मामले पर जब अनुविभागीय अधिकारी से बात की, तो उन्होंने संक्षिप्त उत्तर दिया – “हम नियमों के अंतर्गत कार्य कर रहे हैं।” पीड़ित परिवार इस उत्तर को प्रशासनिक टालमटोल और संवेदनहीनता बता रहा है।

जोहेल परिवार की चेतावनी: “धरना देंगे, कानूनी लड़ाई लड़ेंगे”

बलवंत सिंह जोहेल ने साफ कहा है कि यदि उनकी गैर-मौजूदगी में जबरन बंटवारा किया गया, तो वे भारत लौटते ही कलेक्टर कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना देंगे और दोषियों के खिलाफ न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएंगे।

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