पेपर लीक कांड ने खोली ‘सुशासन’ की सच्चाई, भाजपा राज में अब शिक्षा-परीक्षा भी असुरक्षित— शास्त्री

राजनांदगांव :-छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं बोर्ड परीक्षा का हिंदी पेपर लीक होने के मामले में प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे प्रशासनिक तंत्र की सबसे बड़ी विफलता करार दिया है। शास्त्री ने आरोप लगाया कि “सुशासन” का दम भरने वाली सरकार के राज में शिक्षा माफिया इस कदर सक्रिय हैं कि प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण बोर्ड परीक्षा की गोपनीयता भी सुरक्षित नहीं रह गई है।
     युवा नेता पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए सरकार से सीधे सवाल किए कि जब प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए कड़े प्रोटोकॉल और पुलिस सुरक्षा का दावा किया जाता है, तो आखिर पेपर परीक्षा से पहले वॉट्सएप और टेलीग्राम तक कैसे पहुँचा? उन्होंने कहा कि यह केवल एक तकनीकी चूक नहीं है, बल्कि विभाग के भीतर बैठे बड़े अधिकारियों और परीक्षा केंद्रों के प्रभारियों की मिलीभगत का नतीजा है। “डबल इंजन” की सरकार का दावा करने वाली भाजपा शासन में शिक्षा व्यवस्था का इंजन पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।
     शास्त्री ने पेपर रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों को होने वाली मानसिक और आर्थिक परेशानियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गांवों से शहर आकर परीक्षा देने वाले छात्रों पर दोबारा परीक्षा देने का आर्थिक बोझ बढ़ गया है। तैयारी के चरम पर परीक्षा का रद्द होना लाखों मेधावी छात्रों के मनोबल को तोड़ने वाला है। इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को लेनी चाहिए, जो एक पारदर्शी परीक्षा आयोजित कराने में भी असमर्थ साबित हुए हैं।
      पूर्व पार्षद ने इस पूरे मामले को एक संगठित भ्रष्टाचार की ओर इशारा करते हुए इसकी उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने संदेह व्यक्त किया कि बिना किसी ऊंचे राजनैतिक या प्रशासनिक संरक्षण के इतनी बड़ी सेंधमारी मुमकिन नहीं है। शास्त्री ने मांग की है कि केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाने के बजाय उन ‘मास्टरमाइंड्स’ को बेनकाब कर जेल भेजा जाए, जिन्होंने प्रदेश के युवाओं के भविष्य का सौदा किया है।
     अंत में, युवा नेता ऋषि शास्त्री ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 10 अप्रैल को होने वाली पुन: परीक्षा में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हुए, तो प्रदेश भर के युवाओं और अभिभावकों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि प्रभावित छात्रों को दोबारा परीक्षा केंद्र तक आने-जाने के लिए विशेष यात्रा भत्ता दिया जाए ताकि उनकी आर्थिक क्षति की कुछ भरपाई हो सके।

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