ग्राम ढारा गांव में सहित उसके आसपास के क्षेत्रों में कबाड़ियों का साम्राज्य तेजी से फैल रहा है। यहां अवैध कारोबार इस कदर बेखौफ चल रहा है कि बिना नंबर की गाड़ियां, बिना कागज़ की मोटरसाइकिलें और चोरी का सामान खुलेआम खरीदा-बेचा जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह कि पुलिस और प्रशासन को सब कुछ मालूम होते हुए भी कार्रवाई का नामोनिशान नहीं है।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा विद्यार्थियों को निःशुल्क बांटी गई साइकिलें भी अब कबाड़ के ढेर में दिखाई दे रही हैं। सरकारी संपत्ति इस तरह कबाड़ बाजार में बिकना न केवल योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि प्रशासन की नाकामी को भी उजागर करता है।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कई कबाड़ी बिना किसी रजिस्ट्रेशन या कागज के कारोबार कर रहे हैं। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह द्वारा उपयोग की गई एक पुरानी साइकिल भी एक कबाड़ी के गोदाम में देखी गई, जिसने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।
नागरिकों का आरोप है कि यह पूरा अवैध नेटवर्क पुलिस-प्रशासन की “निगरानी” में ही फल-फूल रहा है। सवाल यह है कि आखिर यह खामोशी क्यों? क्या इन कबाड़ियों को किसी “ऊपर वाले” का संरक्षण प्राप्त है? जनता अब जवाब मांग रही है — डोंगरगढ़ और उसके आसपास कब तक चलेगा यह अवैध खेल?