सुशासन तिहार में पशुधन विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिला: ऋषि शास्त्री

बेजुबान पशुओं की समस्याओं को लेकर सौंपा ज्ञापन, जिला पशु चिकित्सालय में आधुनिक सुविधाएं शुरू करने की मांग

राजनांदगांव। प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित “सुशासन तिहार” में उस समय अव्यवस्था की स्थिति सामने आई, जब बेजुबान पशुओं की समस्याओं को लेकर पहुंचे कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री को वहां पशुधन विभाग का एक भी जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला। इसे लेकर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि शासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए शिविर आयोजित कर रहा है, लेकिन पशुपालकों और मूक पशुओं से जुड़े मामलों के लिए जिम्मेदार विभाग की अनुपस्थिति सरकार की गंभीर लापरवाही को दर्शाती है।
ऋषि शास्त्री ने सुशासन तिहार प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए जिला पशु चिकित्सालय राजनांदगांव से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। उन्होंने बताया कि जिला पशु चिकित्सालय परिसर में डीएमएफ मद से लगभग 20 लाख रुपए की लागत से नवीन शल्य क्रिया भवन का निर्माण करीब दो वर्ष पहले पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक उसका लोकार्पण नहीं किया गया है। इसके चलते भवन का उपयोग शुरू नहीं हो पाया और पशुपालकों को आधुनिक उपचार सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि जिले में लगातार सड़क दुर्घटनाओं, बीमारी और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में पशु घायल हो रहे हैं। कई मामलों में समय पर उपचार नहीं मिलने से पशुओं की मौत तक हो जाती है। इसके बावजूद जिला पशु चिकित्सालय में आज तक एक्स-रे और सोनोग्राफी जैसी मूलभूत जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। गंभीर रूप से घायल पशुओं के उपचार में चिकित्सकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
ऋषि शास्त्री ने कहा कि पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए दूसरे जिलों तक जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ने के साथ-साथ समय भी बर्बाद होता है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले पशुपालकों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि जिला पशु चिकित्सालय में जल्द से जल्द एक्स-रे मशीन, सोनोग्राफी मशीन, आधुनिक शल्य उपकरण तथा आवश्यक तकनीकी स्टाफ की व्यवस्था की जाए, ताकि पशुओं को समय पर बेहतर उपचार मिल सके।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई कि “ट्रिपल इंजन सुशासन तिहार” में पशुधन विभाग का अलग स्टॉल लगाया जाए, जिससे पशुपालकों और पशु हित से जुड़े मामलों का मौके पर ही निराकरण किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि शासन वास्तव में सुशासन की बात करता है तो पशुपालकों और बेजुबान पशुओं की समस्याओं को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
ऋषि शास्त्री ने कहा, “मैं बेजुबान पशुओं की समस्याओं को लेकर आवेदन देने पहुंचा हूं, लेकिन यहां पशुधन विभाग का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। शासन को पशुधन विभाग की जवाबदेही तय करनी चाहिए, ताकि पशुपालकों और पशुओं से जुड़े मामलों का समय पर समाधान हो सके।”

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