डाक्टर आफ फिलासफी डिग्री से सम्मानित हुए हरिशंकर झारराय

जिले के हिंदी व छत्तीसगढ़ी के साहित्यकारों के अवदान पर किया शोध

राजनांदगांव / कृषि व्यवसाय से जुड़े हिंदी व छत्तीसगढ़ी साहित्य में रुचि रखने वाले कवि हरिशंकर झारराय ने शंकराचार्य वि० वि० से राजनांदगाव जिले के रचनाकारो का हिंदी व छत्तीसगढ़ी के साहित्य मे योगदान और विकास पर शोध प्रबंध प्रस्तुत कर डाक्टर आफ फिलासफी की डिग्री हासिल की है। उन्हें उक्त साहित्य शोध पर विद्या वाचस्पति की उपाधि मेट्स विश्व विद्यालय -रायपुर के कुलपति डॉ के,पी यादव‌ व शोध प्रबंधक डा,सुनीता शशिकांत तिवारी,एच ओडी डॉ रेशमा अंसारी व छत्तीसगढ़ कालेज की डा, शिखा बेहार के हाथों प्रदत्त किया गया।

 छत्तीसगढ़ साहित्य समिति से जुड़े साहित्यिक अभिरुचि वाले हरिशंकर झारराय को उक्त उपाधि मिलने से छत्तीसगढ़ी व हिंदी साहित्य जगत के लोगों में हर्ष व्याप्त है।

बता दें कि पीएचडी डिग्री हासिल करने वाले डॉ हरिशंकर झारराय ने अपना शोध प्रबंध मेट्स विश्व विद्यालय – रायपुर की प्राध्यापिका डॉ सुनिता शशिकांत राय के मार्गदर्शन में प्रस्तुत किया है। उन्होंने अपने उक्त शोध प्रबंध में राजनांदगांव के कला /संगीत,साहित्य सुधि राजा हिमांचल दास 1830 से लेकर अन्य कवि साहित्यकारों रचनाकारो की रचनाओं को बहुत बारीकी व व्यवस्थित ढंग से उल्लेखित किया है। इनमें से प्रमुख‌ साहित्य मूर्धन्यों में डा० पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी, बल्देव प्रसाद मिश्र , कुंजबिहारी चौबे आदि से लेकर नंदूलाल चोटियां, रमेश याज्ञनिक,शरद कोठारी, आचार्य सरोज द्विवेदी के नाम विशेष तौर पर उल्लेखित है। उन्होंने अपने इस उपलब्धि का श्रेय अपनी धर्म पत्नी श्रीमती गीता झारराय , साहित्यिक अभिरुचि वाले श्वसुर रत्नुराम साकार को दी है।

जिले के साहित्यकारो पर पहला शौध प्रबंध

बता दें कि साहित्य समिति से जुड़े डॉ झारराय जिले के सबसे पहली साहित्य सुधि है जो छत्तीसगढ़ के साहित्य सृजन परंपरा में राजनांदगांव का साहित्य इतिहास पर शोध कार्य किया है। झारराय के इस शोध कार्य में वर्तमान के साहित्यकारों से मिल कर सामग्रियां उपलब्ध कराने में जिले के वरिष्ठ कवि/ साहित्यकार एवं लोक कला धर्मी आत्माराम कोशा “अमात्य” द्वारा भरपूर मदद की गई। शोध प्रबंध के शुरुआती दौर में डा, संतराम देशमुख “विमल” द्वारा तत्संबंधित पठनीय सामग्री के अलावा डा पीसी लाल यादव जीवन यदु राही, गिरीश बख़्शी, चोटियां जी आदि के घरो में जा कर तत्संबंधित सामग्रियों का संकलन किया गया। श्री झारराय के विद्या वाचस्पति (डाक्टर आफ फिलासफी)की उपाधि मिलने पर कला साहित्य जगत में खुशी की लहर है। इस उपलब्धि के लिए झारराय को छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति, साकेत साहित्य परिषद, शिवनाथ धारा के कवि साहित्यकारों सहित डॉ शंकर मुनि राय, छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक आत्माराम कोशा “अमात्य”डॉ संतराम देशमुख “विमल” अखिलेश मिश्रा “अकाट्य” दादू लाल जोशी, कैलाश श्रीवास्तव, अब्दुस्सलाम कौसर, सुषमा शुक्ला अंशुमन, थंगेश्वर कुमार साहू “मीत” मानसिंह ‘मौलिक” व अन्य कवि साहित्यकारों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

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