स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में फीस लागू करने का निर्णय गरीबों के सपनों पर प्रहार – ऋषि शास्त्री

राजनांदगांव। प्रदेश सरकार द्वारा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से शुल्क वसूली के निर्णय को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। इस मुद्दे पर युवा कांग्रेस नेता एवं पूर्व पार्षद ऋषि शास्त्री ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए फैसले को गरीब एवं मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ बताया है।

ऋषि शास्त्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई स्वामी आत्मानंद विद्यालय योजना का मूल उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निःशुल्क, गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी माध्यम शिक्षा उपलब्ध कराना था। इस योजना ने प्रदेश के लाखों परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा का अवसर दिया और सरकारी शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव लाया।

      उन्होंने कहा कि हाल ही में सामने आई खबरों के अनुसार अब इन विद्यालयों में विभिन्न मदों के तहत छात्रों से शुल्क वसूला जाएगा, जिससे गरीब एवं मध्यम वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।

     “पहले से ही महंगाई और आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आत्मानंद विद्यालयों का सहारा लेते हैं, लेकिन अब फीस लागू कर उनके सपनों पर कुठाराघात किया जा रहा है,”

      शास्त्री ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर सरकार “सुशासन” के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधा पर शुल्क लगाकर आम जनता को उससे वंचित किया जा रहा है। “यह दोहरी नीति अब जनता के सामने उजागर हो चुकी है। शिक्षा को अधिकार के बजाय कमाई का जरिया बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है,”

       उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार कांग्रेस सरकार की महत्वाकांक्षी और जनहितकारी योजनाओं को आगे बढ़ाने के बजाय उन्हें कमजोर करने का कार्य कर रही है।

    शास्त्री ने कहा “स्वामी आत्मानंद विद्यालय योजना ने सरकारी स्कूलों की छवि बदली थी, लेकिन अब इसे धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं,”

“शिक्षा कोई व्यापार नहीं है, यह सरकार की जिम्मेदारी है। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,”

अंत में शास्त्री ने प्रदेश सरकार से मांग की कि स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में शुल्क वसूली के निर्णय को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए, ताकि गरीब एवं मध्यम वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

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