
(राजनांदगांव)।
डोंगरगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत मुड़पार में नदी के किनारे अवैध रेत उत्खनन की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। यह रेत उत्खनन क्षेत्रीय नदी के प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है और भविष्य में स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्याएँ खड़ी कर सकता है।
नदी का गहरा संकट
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मुड़पार क्षेत्र में नदी के किनारे से अवैध रूप से रेत का खनन किया जा रहा है। यह रेत व्यापार के लिए बड़े पैमाने पर निकाली जा रही है, जो नदी के किनारे के पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट करने का कारण बन रही है। यह घटना विशेष रूप से तब चिंता का कारण बन जाती है, जब आसपास के इलाकों में जल स्तर गिरने के संकेत मिल रहे हैं।
स्थानीय लोगों की नाराजगी
ग्राम पंचायत मुड़पार के कुछ ग्रामीणों ने इस गतिविधि पर विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह अवैध उत्खनन उनके खेतों और आसपास की जलवायु को नुकसान पहुँचा रहा है। “रेत उत्खनन से नदी की धारा की दिशा बदलने लगी है, और जल स्तर भी घट रहा है, जिससे हमारी कृषि में समस्या आ रही है,” एक स्थानीय निवासी ने कहा।
प्रशासन की नाकामी लेकिन अवैध रेत खनन की घटनाएँ थमने का नाम नहीं ले रही हैं। कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि रेत माफिया प्रशासन से मिलीभगत कर इस अवैध कारोबार को जारी रखे हुए हैं। और प्रशासन से अपील
इस बढ़ती समस्या पर काबू पाने के लिए समाज और प्रशासन से अधिक कड़ी कार्रवाई की आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रेत के अवैध खनन से नदी के पानी की गुणवत्ता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही यह क्षेत्र में बाढ़ के खतरे को भी बढ़ा सकता है।ग्राम पंचायत मुड़पार में जलवायु संकट की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को तत्काल अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।?
