सूर्य उपासना, दान-पुण्य और फसल उत्सव का संगम है मकर संक्रांति – शिव वर्मा

राजनांदगांव। मकर संक्रांति भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख और पावन पर्व है जो न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि प्रकृति, कृषि और सामाजिक परंपराओं का भी उत्सव है। इस अवसर पर नगर निगम भाजपा के वरिष्ठ पार्षद शिव वर्मा ने मकर संक्रांति के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व जीवन में सकारात्मक परिवर्तन, स्वास्थ्य और सौभाग्य का संदेश देता है।

श्री वर्मा ने आगे कहा कि मकर संक्रांति का विशेष महत्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने से जुड़ा है। इसी दिन से उत्तरायण की शुरुआत होती है जिसे सर्द ऋतु के अंत और लंबे, उजाले भरे दिनों की शुरुआत के रूप में देखा जाता है। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन माना गया है इसलिए इस काल में किए गए धार्मिक और पुण्य कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न का दान करने से आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। सूर्य देव की आराधना से जीवन में ऊर्जा, तेज और सकारात्मकता का संचार होता है।मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि यह किसानों के लिए फसल कटाई और नए कृषि चक्र की शुरुआत का भी उत्सव है। इस अवसर पर समाज में उल्लास और भाईचारे का वातावरण देखने को मिलता है। घर-घर में तिल-गुड़ से बने लड्डू, खिचड़ी और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं, जो आपसी प्रेम और मिठास का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि पतंगबाजी मकर संक्रांति की एक प्रमुख परंपरा है जो खुले आकाश में स्वतंत्रता, उमंग और उत्साह का संदेश देती है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस पर्व को पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। अंत में शिव वर्मा ने नगरवासियों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति लेकर आए तथा समाज में सकारात्मक सोच और सांस्कृतिक मूल्यों को और मजबूत करे।

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