डा ० सुरेंद्र दुबे को श्रद्धा-नमन करने संस्कार धानी से पहुंचे पूर्व सांसद अभिषेक सिंह और बडी संख्या में कवि/साहित्यकार

रायपुर के श्रद्धा- नमन कार्यक्रम में जुटे सैकड़ों राजनीतिज्ञ, कवि/ साहित्यकार एवं कलाकार

संस्कार धानी नगरी के तुमड़ीबोड में दुबे जी को प्रथम कवि मंच उपलब्ध

राजनांदगांव / देश के प्रख्यात कवि और हास्य-व्यंग्य के मसीहा /साहित्यकार पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे के रायपुर में आयोजित श्रद्धा- नमन कार्यक्रम में संस्कार धानी से जिले के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह सहित बड़ी संख्या में कवि साहित्यकार शामिल हुए और उन्हें याद करते हुए भाव पूरित श्रद्धा – नमन किया गया।
छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग (छ०ग० शासन) के जिला समन्वयक, वरिष्ठ कवि- साहित्यकार आत्माराम कोशा “अमात्य” के नेतृत्व में रायपुर के सालासर बालाजी धाम में आयोजित श्रद्धा- नमन कार्यक्रम में पहुंचे कवि / साहित्यकारों के बीच राजनांदगांव जिले के पूर्व सांसद अभिषेक सिंह ने पहुंच कर पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
*राजनांदगांव के तुमड़ीबोड़ में प्रथम मंच उपलब्ध*
प्रदेश के पं० सुंदरलाल शर्मा साहित्य सम्मान राज्य अलंकरण से सम्मानित वरिष्ठ कवि/साहित्यकार रामेश्वर वैष्णव ने पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को छत्तीसगढ़ी में श्रद्धा-नमन करते हुए कहा कि श्री दुबे जी को सर्वप्रथम1982 में साहित्य नगरी राजनांदगांव के ग्राम तुमड़ीबोड मे संत कवि पवन दीवान, लक्ष्मण मस्तुरिहा, मुकुंद कौशल आदि वरिष्ठ कवियों के द्वारा सर्वप्रथम मंच उपलब्ध कराया गया। उसके बाद से उनकी ख्याति देश- दुनिया में बढ़ती ही चली गई। वे छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में दर्ज कराने प्राण- रण से जुटे रहे। उनके अधूरे कार्य को पूरा करना ही स्वर्गीय दुबे जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। लोक सांस्कृतिक संस्था अनुराग -धारा के उद्घोषक रहे रंगकर्मी विजय मिश्रा अमित ने बताया कि राजनांदगांव दशहरा उत्सव समिति के भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन उनके बिना पूरा नहीं होता था।
वरिष्ठ कवि साहित्यकार श्री कोशा ने स्व० दुबे के विशाल तैल चित्र पर पुष्पार्पण करते हुए मन ही मन कहा कि जिस तरह -“भगवान विष्णु को शालिग्राम रुप में अपने चरणों में स्थान देने वाली माता तुलसी- वृंदा है,,
वैसे ही भगवान श्री दुबे को अपने चरणों में स्थान दें,/ कविता का टाइगर अभी भी हम सभी के दिलों में जिंदा है ।। सालासर बालाजी धाम के विशाल हाल में आयोजित श्रद्धा- नमन कार्यक्रम के दौरान संस्कार धानी के ग्रामीण कवि आनंद राम सार्वा की *बड़ सुरता आबे दुबे जी* कविता विशाल स्क्रीन पर तैरती रही। वहीं पर्यटन मंडल के अध्यक्ष नीलू शर्मा भी उक्त विशाल स्क्रीन पर डॉ सुरेंद्र दुबे के साथ नजर आ रहे थे।
*रुला कर चला गया हंसाने वाला कवि*
पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को श्रद्धा-नमन करने दिल्ली, मुंबई राजस्थान, गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से बड़े-बड़े जाने- माने कवि साहित्यकारों का आगमन हुआ था वहीं बड़ी संख्या में राजनीतिक लोगों की उपस्थिति बनी रही। श्रद्धा नमन कार्यक्रम में पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हास्य-व्यंग्य के कवि पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे जी छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत थे। श्री साय ने कहा कि सभी को हंसाने वाला यह महान कवि आज हमें रुला कर चला गया। उनका आकस्मिक निधन पूरे राज्य और साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
*हरेली त्योहार में आने का न्योता*
श्रद्धा नमन कार्यक्रम के पश्चात श्री कोशा सहित कथाकार मानसिंह “मौलिक”, कवि लखन लाल साहू ‘लहर’ पवन यादव “पहुना” आदि अन्य रचनाधर्मियों के साथ आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम अधिशासी महेंद्र साहू जी के साथ सौजन्य भेंट की और छत्तीसगढ़ के प्रथम लोक पर्व हरेली पर संस्कार धानी नगरी आने का न्योता दिया।

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