महंगाई, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उठाए सवाल

आज की स्थिति आपातकाल से अधिक चिंताजनक : संतोष पिल्ले

राजनांदगांव।

नगर निगम राजनांदगांव के नेता प्रतिपक्ष संतोष पिल्ले ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि भारतीय जनता पार्टी आज 1975 के आपातकाल का उल्लेख कर स्वयं को लोकतंत्र का सबसे बड़ा संरक्षक बताने का प्रयास कर रही है, लेकिन उसे वर्तमान समय में लोकतांत्रिक संस्थाओं, संवैधानिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों की वास्तविक स्थिति पर भी जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल इतिहास की घटनाओं को दोहराने से मजबूत नहीं होता, बल्कि वर्तमान में जनता की आवाज और संस्थाओं की स्वायत्तता को सुरक्षित रखने से मजबूत होता है।

श्री पिल्ले ने कहा कि वर्ष 1975 में लगाया गया आपातकाल तत्कालीन संवैधानिक प्रावधानों के तहत घोषित किया गया था। परिस्थितियां असाधारण थीं और उस निर्णय के बाद कांग्रेस जनता के बीच चुनाव में गई। जनता ने जो जनादेश दिया, कांग्रेस ने उसे पूरी विनम्रता के साथ स्वीकार किया और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरित की। उन्होंने कहा कि यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान और कसौटी है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि भाजपा स्वयं को लोकतंत्र की सबसे बड़ी हितैषी मानती है तो उसे यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि आज विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों की लगातार कार्रवाई क्यों हो रही है। देशभर में निर्वाचित सरकारों को अस्थिर करने के आरोप क्यों लग रहे हैं। संसद के भीतर विपक्ष की आवाज को सीमित करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उठ रहे सवालों का जवाब भी भाजपा को देना चाहिए। उन्होंने ने कहा कि कांग्रेस ने अपने इतिहास से सीख लेते हुए लोकतंत्र और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को समय-समय पर साबित किया है। वहीं भाजपा आज भी पांच दशक पुराने घटनाक्रम को मुद्दा बनाकर वर्तमान चुनौतियों और अपनी नीतिगत विफलताओं से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। श्री पिल्ले ने कहा कि देश की जनता अब अतीत की राजनीति नहीं, बल्कि वर्तमान की समस्याओं का समाधान चाहती है। उन्होंने कहा कि आज युवाओं के सामने बेरोजगारी गंभीर चुनौती बन चुकी है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिससे आम परिवारों का बजट बिगड़ गया है। किसानों की आय बढ़ाने के दावों के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। वहीं कई क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था भी चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब मजबूत माना जाता है जब जनता के सवालों का जवाब दिया जाए और उसकी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में आम नागरिकों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को इतिहास की राजनीति छोड़कर वर्तमान चुनौतियों और जनता से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय करनी चाहिए। श्री पिल्ले ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पहले भी प्रतिबद्ध थी आज भी है और भविष्य में भी अपनी इस प्रतिबद्धता पर अडिग रहेगी। उन्होंने कहा कि देशहित में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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