बड़ा नाला बना मुरूम-बजरी का अड्डा? बखत रेंगकठेरा में उठे सवाल, ग्रामीण बोले – आखिर किसके संरक्षण में चल रहा काम!

राजनांदगांव ब्लॉक के ग्राम बखत रेंगकठेरा का बड़ा नाला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नाला क्षेत्र से लगातार मुरूम और बजरी निकासी किस आधार पर की जा रही है। ग्रामीणों के बीच इसको लेकर नाराजगी और चिंता दोनों दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि यह कार्य पूरी तरह नियमों और अनुमति के अनुसार हो रहा है तो इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए, लेकिन यदि बिना वैध प्रक्रिया के सामग्री निकाली जा रही है तो यह गंभीर जांच का विषय है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ समय से क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ी हुई दिखाई दे रही है। लोगों का दावा है कि दिन के साथ-साथ कई बार शाम के समय भी गतिविधियां देखी गई हैं। इससे आसपास रहने वाले लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह काम किसकी जानकारी में हो रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ा नाला केवल एक सामान्य जलधारा नहीं बल्कि आसपास के खेतों और भूजल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में अनियंत्रित या नियमों के विपरीत खुदाई होने पर भविष्य में जलभराव, मिट्टी कटाव और पर्यावरणीय असर जैसे मुद्दे सामने आ सकते हैं। इसी कारण ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग मौके पर जाकर स्थिति स्पष्ट करे।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पहले जहां बरसात के समय पानी का बहाव सामान्य रहता था, अब वहां जगह-जगह बदलाव दिखाई देने की चर्चा है। लोगों का कहना है कि यदि नाला क्षेत्र की संरचना प्रभावित होती है तो इसका असर सीधे खेती और आसपास के पर्यावरण पर पड़ सकता है।
गांव में यह भी चर्चा है कि यदि किसी प्रकार का उत्खनन किया जा रहा है तो उसकी अनुमति, सीमा, अवधि और शर्तों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। लोगों का तर्क है कि पारदर्शिता होने पर विवाद और आशंकाएं दोनों कम हो जाती हैं।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन, खनिज विभाग और संबंधित अधिकारी संयुक्त निरीक्षण करें और यह स्पष्ट करें कि—
क्या क्षेत्र में किसी प्रकार की वैध अनुमति जारी है?
यदि अनुमति है तो उसकी सीमा क्या है?
क्या निर्धारित नियमों का पालन हो रहा है?
पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन किया गया है या नहीं?
भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीण क्षेत्र पर क्या असर पड़ रहा है?
लोगों का कहना है कि जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आएगी और अनावश्यक अफवाहों पर भी रोक लगेगी। ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया कि यदि कोई गतिविधि वैध है तो उसकी जानकारी सूचना बोर्ड या सार्वजनिक सूचना के माध्यम से दी जाए।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि प्राकृतिक संसाधन किसी एक व्यक्ति या समूह की संपत्ति नहीं होते, बल्कि उनका उपयोग नियमों और सामुदायिक हितों को ध्यान में रखकर होना चाहिए। इसी वजह से वे चाहते हैं कि मामले में जल्द स्पष्टता आए।
फिलहाल इस विषय में संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट मानी जाएगी। यदि ग्रामीणों द्वारा उठाए गए सवाल सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है, और यदि कार्य वैध पाया जाता है तो लोगों की शंकाओं का समाधान भी हो सकेगा।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि रेंगकटेरा के बड़ा नाला को लेकर उठे सवालों पर जिम्मेदार विभाग कब और क्या जवाब देता है।?

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