राजनांदगांव। आदर्श थोक फल-सब्जी मंडी प्रांगण में इलेक्ट्रॉनिक कांटे से होने वाली तौल
को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ग्राहक एक किलो मिर्च का पैसा दे रहा है, लेकिन हाथ में कथित तौर पर सिर्फ 850 ग्राम मिर्च पहुंच रही है! यानी एक किलो की खरीदारी में करीब 150 ग्राम की कमी—आखिर यह अंतर कैसे पैदा हो रहा है?
ग्राहकों की शिकायत है कि इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर तौल के दौरान उन्हें पूरी मात्रा का भरोसा दिलाया जाता है, लेकिन माल मिलने के बाद वजन करने पर मात्रा कम होने की बात सामने आती है। अगर शिकायत सही पाई जाती है, तो सवाल सिर्फ 150 ग्राम का नहीं है—सवाल है कि रोजाना होने वाली सैकड़ों किलो की खरीद-बिक्री में कुल कितनी मात्रा का अंतर हो सकता है?
मंडी में सब्जी खरीदने पहुंचे ग्राहक आखिर किस तौल पर भरोसा करें? मशीन पर दिखने वाला वजन सही है या माल देते समय कहीं कोई खेल हो रहा है? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
150 ग्राम की कमी, जवाब कौन देगा?
एक किलो मिर्च के बदले 850 ग्राम मिलने की शिकायत को हल्के में नहीं लिया जा सकता। ग्राहकों की मांग है कि मंडी में लगे इलेक्ट्रॉनिक कांटों की अधिकृत विभाग से जांच, सत्यापन और मौके पर दोबारा तौल कराई जाए। साथ ही ग्राहक के सामने माल की तौल और डिलीवरी की प्रक्रिया की भी जांच हो।
अब निगाहें मंडी प्रबंधन और संबंधित तौल-माप विभाग पर हैं। अगर कांटा सही है तो 850 ग्राम की शिकायत का सच क्या है? और अगर तौल में गड़बड़ी मिलती है, तो जिम्मेदार कौन?
मंडी में रोज हजारों किलो फल-सब्जियों की खरीद-बिक्री होती है। ऐसे में छोटी दिखने वाली वजन की कमी भी बड़े स्तर पर पहुंच सकती है। इसलिए ग्राहकों की शिकायत की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
एक किलो का दाम, 850 ग्राम माल—आखिर मंडी के इलेक्ट्रॉनिक कांटे की कहानी क्या है? अब जांच से ही खुलेगा पूरा राज।
को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। ग्राहक एक किलो मिर्च का पैसा दे रहा है, लेकिन हाथ में कथित तौर पर सिर्फ 850 ग्राम मिर्च पहुंच रही है! यानी एक किलो की खरीदारी में करीब 150 ग्राम की कमी—आखिर यह अंतर कैसे पैदा हो रहा है?