

राजनांदगांव। 25, फरवरी छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव द्वारा शिक्षा के अधिकार (RTE) कानून को लेकर दिए गए जवाब पर विवाद खड़ा हो गया है। अकलतरा विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह के सवाल पर मंत्री ने सदन में कहा कि आरटीई के तहत अब केवल कक्षा पहली में प्रवेश दिया जा रहा है और नर्सरी में भर्ती बंद कर दी गई है, क्योंकि यह कानून 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर लागू नहीं होता।
तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप
छत्तीसगढ़ पैरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने मंत्री के इस बयान को भ्रामक और आरटीई कानून की गलत व्याख्या बताया है। श्री पॉल ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह को पत्र लिखकर मंत्री के खिलाफ ‘विशेषाधिकार हनन’ की कार्यवाही की मांग की है।
धारा 12(1)(ग) का उल्लंघन आरटीई कानून की स्पष्ट व्याख्या है कि यदि कोई स्कूल पूर्व-प्राथमिक (नर्सरी/केजी) संचालित करता है, तो वहां भी 25% सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है।
एक ओर विभाग स्वयं 5 वर्ष के बच्चों को कक्षा पहली में प्रवेश की अनुमति दे रहा है, वहीं मंत्री सदन में 6 वर्ष से कम आयु पर कानून लागू न होने की बात कह रहे हैं, जो परस्पर विरोधी है।
नर्सरी स्तर पर आरटीई प्रवेश बंद होने से हजारों गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे निजी स्कूलों में प्रारंभिक शिक्षा के अपने कानूनी अधिकार से वंचित हो जाएंगे।
श्री पॉल ने कहा कि सदन को गुमराह करना संसदीय परंपराओं के विरुद्ध है। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया है कि इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए और मंत्री द्वारा दी गई “मिथ्या जानकारी” पर उचित वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए।
