रायल मेट्रो बसें एवं ओड़िसा राज्य की नान स्टाप बसें रुककर छोटी दुरी की लोकल पेसेंजरो को चढ़ा रही, स्थानीय बसों के मालिकों में आक्रोश उत्पन्न 

लोकल पेसेंजर बसों के मालक चालकों नें लम्बी दुरी तय करने वाली बसों के ऊपर लगाया आरोप

सोमवार 2 दिसंबर2025,बसना /सराईपाली/रायपुर. आर टी ओ परिवाहन विभाग द्वारा अनुमति प्राप्त सरायपाली से नॉन स्टॉप रायपुर तक चलने वाली रायल मेट्रो एवं उड़ीसा, झारखण्ड रांची राज्य की तरफ से आने वाली ऐसी बसों द्वारा 10कि.मी., 20कि. मी. नजदीक तक के सवारियों को बसना, भगतदेवरी, साकरा से चढ़ा कर आगे नजदीक पिथौरा झलप तक उतारने का कार्य कर रही है जबकि उन्हें लम्बी दुरी तक का सवारी बिठाने का अनुमति रहता है.

 जिसकी मनमानी करने की सूचना लोकल बसों के ड्राइवर एवं मालिकों को मिलने पर रॉयल मेट्रो बस एवं उड़ीसा, झारखण्ड राज्यों के बस के ऊपर आरोप लगाए हैं कि इस तरह से नियम विरुद्ध मनमानी कार्य करेंगे तो हमारी रोजी-रोटी का क्या होगा, आर टी ओ विभाग के अफसरों द्वारा इस दिशा में कोई प्रतिबंधात्मक कार्यवाही कर कोई ठोस नियम नहीं निकालते है तो आगे लोकल बसों और नान स्टॉप ड्राइवरो के मध्य लोकल सवारीयों को चढ़ाने एवं उतारने के लेकर भविष्य में तनाव एवं टकराव की गंभीर स्थिति उत्पन्न होंनें की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जिसके जिम्मेदार छग राज्य की परिवाहन विभाग के अधिकारी होंगे,

 बसना से बैठने वाले ककई सवारी ने अपनी आपबीती में बताया कि लंबी दूरी वाली नानस्टॉप बसों में बैठकर रायपुर तक का बस टिकट किराया उनसे 350 रूपये तक बदसूलकी करके जबरन लिया जाता है जिसकी शिकायत लोकल बस स्टेण्ड के बस एजेंट को नहीं कर सकते हैं

गौरतलब बात है कि नान स्टाप बसों के कारण लोकल बस ड्राइवरों और मालिकों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिससे लोकल बसों के चालकों और मालिकों को आर्थिक नुकसान हुआ है। चूंकि नान स्टाप बसें कम समय में यात्रा पूरी करती हैं, यात्री उन्हें अधिक पसंद करते हैं, जिससे लोकल बसों में यात्रियों की संख्या कम हो जाती है। इसका लोकल बसों पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है साथ ही यात्रियों के कम होने से लोकल बसों की आमदनी कम हुई है।

 नान स्टाप बसों के आगमन से लोकल बसों के सामने एक नई और बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है, जिससे उनके मालिकों एवं चालकों के परिवारों के सामने रोजी रोटी का संकट आ गया है

सराईपाली से बसना तक की नान स्टाप बसें, जिन्हें कम स्टॉप पर रुकना पड़ता है, यात्रियों को तेजी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाती हैं, जिससे वे लोकल बसों के मुकाबले अधिक लोकप्रिय हो जाती हैं।इस कारण लोकल बसों को प्रतियोगिता में नानस्टॉप बसों से पिछड़ना पड़ जा रहा है.

 इस स्थिति के कारण लोकल बस चलाने वाले ड्राइवरों और मालिकों में मायूसी छाई हुई है, क्योंकि उन्हें अब अपने यात्रियों को खोने का डर है और वे व्यवसाय में टिके रहने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

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