दिग्विजय स्टेडियम सचिव के अभाव में अनाथ सोलंकी

राजनांदगांव:- देश के सर्व श्रेष्ठ स्टेडियम में से एक दिग्विजय स्टेडियम सचिव के अभाव में अनाथ स्थिति मे है।

उक्त जानकारी दिग्विजय स्टेडियम के भूतपुर्व सचिव कुतबुद़्दीन सोलंकी ने दी। सोलंकी ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॅा. रमन सिंह के प्रयास से खेलो का स्तर बढ़ाने के लिए ५७ करोड़ से स्टेडियम समिति का नव निर्माण किया गया था। इस समय स्टेडियम का कोई बाप नजर नहीं आ रहा है।

स्टेडियम में रख- रखाव व सुरक्षा का पुर्णत: अभाव है,स्टेडियम में कई दुकानों का निर्माण किया गया है, एवं स्टेट बैंक की मुख्य शाखा भी यहां संचालित है। कुछ ही समय यह एल.आई.सी. की मुख्य शाखा प्रांरभ होने वाली है। इतना महात्वकांक्षी स्टेडियम मैनेजर के भरोसे है।

स्टेडियम समिति के प्रभारी अधिकार पर भी प्रशासनीक कार्यो का बोझ रहता है। इसलिए वो भी स्टेडियम के कार्यो पर उतना ध्यान नहीं दे पाते ।

सोलंकी ने कहा कि उन्हें १९९६ में सर्वसम्मपति से दिग्विजय स्टेडियम का सचिव नियुक्ति किया गया था, तब से २०१२ तक दिग्विजय स्टेडियम का सचिव रहा एवं खेल और स्टेडियम कार्यो के लिए पूरे देश में ख्याति प्राप्त हुई थी। २०१२ में राजनीतिक पूर्वाग्रह के कारण उस समिति को भंग कर दिया गया था, उसके बाद से समिति बिना सचिव के लावारिश ढंग से चल रही है। जिसका नुकसान यह होगा कि पिछले ७ वर्षो से नये स्टेडियम के बनने के पश्चात् कई खेलो व स्टेडियम के सभी सुविधाओं के स्थानीय खिलाड़ी वर्चित है।

भुतपूर्व सचिव व हाकी खिलाड़ी सोलंकी ने बताया कि वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष डॅा. रमन सिंह के प्रयासो से दिग्विजय स्टेडियम समिति द्वारा आयोजित देश कि ख्याति प्राप्त महेंत राजा सर्वेश्वर दास स्मृति अखिल भारतीय हौकी प्रतियोगिता के लिए खर्च कि जाने वाली राशि के बजट में प्रावधान करने के कारण इस प्रतियोगिता का अनवरत आयोजन जारी है।

  सोलंकी ने कहा कि दलगत राजनीति से दूर रहते हुए राजनांदगांव खेलो के विकास के लिए दिग्विजय स्टेडियम का सचिव तुरंत बनाना चाहिए और सचिव कोई खिलाडी हो इस बात का ध्यान रखा जाये। उन्होंने इस हेतु माननीय डॅा. रमन सिंह जी से अनुरोध किया है कि आप इस मामले मे व्यक्तिगत रूप से हस्ताक्षेप करते हुए दिग्विजय स्टेडियम समिति बनाकर उसका किसी भी खिलाडी को समिति का सचिव बनाना चाहिए यही शहर के सभी खिलाडियों की दिली इच्छा है।

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