शासकीय हायर सेकेंडरी विद्यालय तिलईरवार में मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती मनाई गई

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तिलईरवार में 31 जुलाई को निबंधकार ,साहित्यकार ,कहानीकार ,उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती बड़े ही गौरव और उत्सव के साथ मनाया गया । कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं मुंशी प्रेमचंद जी के तैलचित्र पर समस्त स्टॉफ सदस्यों एवं छात्र-छात्राओं के द्वारा पूजा अर्चना कर आरंभ किया गया । कार्यक्रम प्रभारी थंगेश्वर कुमार साहू व्याख्याता ने मुंशी प्रेमचंद जी के जीवन परिचय के ऊपर प्रकाश डाला गया । साथ ही बताएं कि प्रेमचंद जी को “उपन्यास सम्राट” के रूप में जाना जाता है। उनकी रचनाएं आज भी प्रासंगिक है और हिंदी साहित्य में उनका स्थान बहुत ऊंचा है । श्रीमती अनुराधा ढोक व्याख्याता ने अपने उद्बोधन में बताया कि मुंशी प्रेमचंद की रचनाओं में सामाजिक समस्याओं, खासकर किसानों और गरीबों की दुर्दशा का चित्रण है । उनकी कई उपन्यास, कहानी, नाटक और निबंध के बारे में जानकारी दिए जैसे सेवासदन , रंगभूमि , कायाकल्प, गबन , कर्मभूमि, गोदान आदि के बारे में सारगर्भित ढंग से व्याख्या किए। इसी कड़ी में हिंदी विषय की व्याख्याता श्रीमती सरोज भुआर्य मैडम जी ने मुंशी प्रेमचंद जी के जीवनी ,लेखन ,साहित्य में योगदान , सामाजिक चेतना आदि के बारे में काफी विस्तार पूर्वक व्याख्या करके सारगर्भित जानकारी दिए । साथ ही साथ यह भी बताएं कि मुंशी प्रेमचंद जी के माता जी का देहांत बचपन में ही हो गया था जिससे उनके जीवन में बहुत कठिनाइयां आई । प्रेमचंद जी का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था उसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई जारी रखा । प्रेमचंद जी ने हंस और जागरण जैसी पत्रिकाओं का संपादन भी किया । वह एक प्रगतिशील लेखक थे और सामाजिक सुधारो के समर्थक थे । इसी कड़ी में कक्षा 10 वीं एवं कक्षा 11वीं से कु. दिव्या,कु. काजल, कु. वेदवती,कु. वैशाली पाल ,कु. जैस्मिन आदि छात्र-छात्राओं ने मुंशी प्रेमचंद जी के बारे में अपनी प्रस्तुति दिए । इस कार्यक्रम में श्रीमती अनुराधा ढोक ,श्रीमती सरोज भुआर्य, श्रीमती रेखा मुरकुटे , श्री थंगेश्वर कुमार साहू , श्री राजेश कुमार नेताम, श्री जितेंद्र कुमार कश्यप , श्री पालक राम वर्मा , श्री नोहर दास लिलहारे , श्री हरिचंद यादव , श्रीअशीष मसीह, सुश्री रीचा चंद्राकर सुश्री हेमीन ठाकुर आदि सभी की उपस्थिति रही। सभी छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही । कार्यक्रम का संचालन थंगेश्वर कुमार साहू व्याख्याता के द्वारा किया गया एवं आभार प्रदर्शन नोहर दास लिलहारे व्याख्याता के द्वारा किया गया ।

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